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Faridabad News: पार्कों के पत्तों से बनेगी खाद, जैविक कचरे का आधुनिक निस्तारण शुरू

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सेक्टर–11, 14 और 18 में लगेंगी मशीनें, रोज 15 टन हरे कचरे से बनेगी जैविक खाद
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर में अब पार्कों से गिरने वाले हरे पत्ते, बागवानी कचरा और घरों से निकलने वाले जैविक अवशेष बेकार नहीं जाएंगे। अब इनसे उपयोगी खाद तैयार की जाएगी। स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने और डंपिंग यार्ड पर दबाव कम करने के उद्देश्य से नगर निगम सेक्टर–11, 14 और 18 में अत्याधुनिक ग्रीन वेस्ट प्रोसेसिंग मशीनें स्थापित करने जा रहा है।

इन मशीनों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 15 टन हरे कचरे को जैविक खाद में परिवर्तित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार प्रत्येक सेक्टर में लगने वाली मशीन की क्षमता प्रतिदिन करीब पांच टन कचरा प्रोसेस करने की होगी। जानकारी के अनुसार शहर में रोजाना लगभग 60 से 70 टन गीला कचरा निकल रहा है जिसमें सबसे अधिक हिस्सा पार्कों की घास, सूखे और हरे पत्ते, पेड़ों की छंटाई से निकला मलबा, फूलों के पौधे और अन्य बागवानी अवशेषों का है। अब तक इस कचरे को सीधे डंपिंग यार्ड भेज दिया जाता है जिससे वहां कचरे का अंबार लगने के साथ दुर्गंध और प्रदूषण की समस्या भी बढ़ रही है।
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इस नई व्यवस्था के अंतर्गत हरे कचरे को पहले मशीन के जरिए काटा जाएगा, फिर सुखाया जाएगा और उसके बाद जैविक प्रक्रिया के जरिए खाद में बदला जाएगा। मशीनों के संचालन और रखरखाव के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी वहीं तैयार खाद की गुणवत्ता जांच भी नियमित रूप से की जाएगी ताकि इसका उपयोग पार्कों और हरित क्षेत्रों में प्रभावी रूप से किया जा सके।

पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर होगी शुरुआत
अधिकारियों ने बताया कि यह योजना स्वच्छता मिशन के तहत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की जा रही है। यदि शुरुआती चरण में यह मॉडल सफल रहता है तो आने वाले समय में अन्य सेक्टरों, औद्योगिक क्षेत्रों और बड़े पार्कों में भी ऐसी मशीनें लगाने की योजना बनाई जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से न केवल शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार होगा बल्कि जैविक खाद के उत्पादन से हरियाली को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही यह मॉडल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मददगार साबित होगा।

बंधवाड़ी डंपिंग यार्ड से घटेगा बोझ

नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि फरीदाबाद को स्वच्छ और पर्यावरणीय रूप से विकसित शहरों की श्रेणी में लाने की दिशा में यह एक अहम कदम है। जैसे-जैसे जैविक कचरे का स्थानीय स्तर पर निस्तारण बढ़ेगा वैसे-वैसे डंपिंग यार्ड पर निर्भरता कम होगी और कचरे को संसाधन के रूप में उपयोग करने की दिशा में शहर आगे बढ़ेगा।
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वर्जन

लोगों की सुविधा के लिए निगम की तरफ से लगातार काम किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस परियोजना का लाभ मिलना भी शुरू हो जाएगा। -गौरव अंतिल, अतिरिक्त आयुक्त नगर निगम
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