मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की महत्वाकांक्षी पिंक बस योजना के तहत मिली 9 पिंक बसें छात्राओं के बजाय लोकल सवारियों ढोकर अपना खजाना भरने में लगी हैं। सीएम की घोषणा के तहत कॉलेज छात्राओं को नि:शुल्क बस सेवा देकर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना को और आगे ले जाना था।
रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि छात्राओं के रूट पर रोडवेज का खजाना खाली हो रहा था, जिसे अब लोकल बस रूट पर चलाकर भरा जा रहा है।
डिपो प्रभारी बोले, बस पास बनवाने में रुचि नहीं ले रहे कॉलेज
डिपो प्रभारी हरि सिंह ने बताया कि छात्रा स्पेशल बस सेवा में खर्च अधिक है और राजस्व में आर्थिक भरपाई कम। हालांकि सरकार ने कमाई के लिए यह बस सेवा शुरू ही नहीं की। इन बसों में छात्राएं ही नहीं आ रही थी। खाली बसों को चलाने से केवल राजस्व का ही नुकसान हो रहा था।
छात्राओं के लिए बनाए जाने वाले नि:शुल्क बस सेवा पास के लिए कॉलेज प्रबंधक रूचि नहीं दिखा रहे। डिपो प्रभारी का कहना है कि नेहरू कॉलेज से लेटर मिला है। वह मोहना-छांयसा रूट पर बस सेवा चाहते हैं। इस बारे में सोमवार को निर्णय लिया जाएगा।
लोकल रूट पर चलाने से फायदा
हरि सिंह के मुताबिक विभाग जब इन बसों को महिला स्पेशल पर चला रहा था तो रोजाना करीब 600-800 रुपये का राजस्व एक गाड़ी से आता था। आम सवारियों के लिए बसें लगाने से एक गाड़ी से करीब छह हजार रुपये का राजस्व आ रहा है। उन्होंने बताया कि नो में से आठ बसें लोकल रूट पर चलाई जा रही हैं।
एक बस फ्लाइंग टीम के पास है। इसमें से चार बसें फ़रीदाबाद - गुरुग्राम रूट पर हैं। दो बसें बदरपुर से पलवल रूट पर और दो बसों को ढैकोला, मोठूका व आईएमटी में लगाया गया है।