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Faridabad News: सीटू ने किया प्रदर्शन, 30 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग

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रविवार को सभा का आयोजन कर सीएम के नाम सौंपा 10 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन
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संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। केंद्र सरकार की नीतियों और न्यूनतम वेतन में संशोधन की मांग को लेकर सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) ने विरोध सभा की। सभा का आयोजन रविवार को सेक्टर-12 स्थित ओपन थिएटर में हुआ। इसके बाद प्रदर्शन करते हुए श्रमिकों ने मुख्यमंत्री के नाम 10 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन नायब तहसीलदार जीवन दास को सौंपा।

सभा में जिला प्रधान निरंतर पाराशर ने बताया कि मौजूदा सरकार ने अपने कार्यकाल में एक बार भी न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी नहीं की। इससे श्रमिकों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। सीटू के राज्य महासचिव जय भगवान ने कहा कि न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 के अनुसार हर पांच वर्ष में वेतन संशोधित किया जाना अनिवार्य है। सरकार ने 2015 के बाद कोई संशोधन नहीं किया जबकि 2020 में संशोधन होना चाहिए था। यदि समय पर संशोधन हुआ होता तो आज हरियाणा का न्यूनतम वेतन भी दिल्ली के बराबर या उससे अधिक होता।
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उन्होंने बताया कि सीटू ने सरकार द्वारा गठित न्यूनतम वेतन संशोधन समिति को 30 हजार रुपये मासिक न्यूनतम वेतन का लिखित प्रस्ताव दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर मजदूरों के अधिकारों की अनदेखी कर रही है और मालिकों को फायदा पहुंचा रही है। सभा में अखिल भारतीय राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रधान सुभाष लांबा, सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान करतार सिंह जागलान, वरिष्ठ उपप्रधान बलवीर बालगुहेर, आंगनवाड़ी वर्कर यूनियन की जिला प्रधान मालवती, मिड डे मील यूनियन की कमलेश, आशा वर्कर यूनियन की हेमलता, भारत गियर, स्टार वायर, गैरियर ऑटो, जीकेएन, और हरियाणा टैक्स प्रिंट यूनियन के प्रतिनिधि विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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मजदूरों की बदहाल स्थिति पर जताई चिंता

सुभाष लांबा ने बताया कि फरीदाबाद में जल्द ही सभी यूनियनों द्वारा एकजुट होकर निर्णायक आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने सीटू के आंदोलन को पूरा समर्थन देने की घोषणा की। सभी वक्ताओं ने मजदूरों की बदहाल स्थिति पर चिंता जताई और बताया कि कैसे श्रमिकों से 12-14 घंटे काम लिया जा रहा है, जबकि उन्हें महज दस हजार से 12 हजार ही वेतन मिलता है। महिला मजदूरों की स्थिति और भी चिंताजनक है। उन्हें कम वेतन, बिना ईएसआई-पीएफ और ओवरटाइम के लिए मजबूर किया जा रहा है। फैक्ट्रियों में यौन उत्पीड़न की शिकायतों के निपटारे के लिए कोई कमेटी तक नहीं बनी है।
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