फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Faridabad News: चाइनीज कंपनी चला रही थी ठग गिरोह, 11 साइबर जालसाज गिरफ्तार

विज्ञापन
विज्ञापन
विदेशों में ठगी का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं आरोपी, इन पर 107 शिकायतें दर्ज मिली
विज्ञापन




पांच खातों के जरिये की गई 70 करोड़ की ठगी, ठगी की राशि को क्रिप्टो करेंसी में तब्दील कर चीन भेजते थे

संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। डिजिटल अरेस्ट, गेमिंग एप और टेलीग्राम पर टास्क देकर लोगों से साइबर ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पलवल पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस गिरोह में शामिल 11 जालसाजों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी ईडी, सीबीआई, आयकर विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी बनकर लोगों के पास कॉल करते हैं और उन्हें ठगी का शिकार बनाते हैं। इस गिरोह को एक चाइनीज कंपनी चला रही थी। पुलिस के अनुसार पकड़े गए आरोपी स्नातक किए हुए हैं। सभी कंबोडिया, वियतनाम व सउदी अरब सहित अन्य देशों में साइबर ठगी का प्रशिक्षण ले चुके हैं। वारदात के दौरान पूरे परिवार को डिजिटल अरेस्ट करते हैं। कॉल कर पीड़ित को मनी लांड्रिंग, उनके बैंक खाते का गलत इस्तेमाल होने सहित अन्य और भय बनाते हैं और गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं। विभिन्न विभागों को नोटिस भी भेजे जाते हैं, ताकि पीड़ित को शक न हो। इसके अलावा टेलीग्राम पर टास्क पूरा कर घर बैठे रुपये कमाने व गेमिंग एप के जरिये ठगी करते हैं। पीड़ित को झांसे में लेकर खुद के बताए खाते में ठगी का राशि को ट्रांसफर कराते हैं। बड़े अमाउंट को तुरंत छोटे अमाउंट में दर्जनों खातों में डाल दिया जाता है, जिसमें बाद में बैंक से निकलवा लिया जाता है। प्रतिदिन 150 करोड़ रुपये की साइबर ठगी पुलिस के अनुसार, देश में ऐसे हजारों लोग सक्रिय हैं, जो प्रतिदिन 150 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करते हैं। ठगी की राशि को सैकड़ों खातों में डालकर निकाला जाता है। या फिर क्रिप्टो करेंसी में बदलकर चीन भिजवाया जाता है। आरोपियों ने पलवल के व्यापारी को डिजिटल अरेस्ट कर 88 लाख रुपये की ठगी की थी, जिसके बाद पलवल साइबर अपराध थाना पुलिस ने गिरोह के जालसाजों को गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ एनसीआरपी पोर्टल पर 107 शिकायतें दर्ज मिली हैं, जिनमें करीब 70 करोड़ रुपये की ठगी की गई है।
विज्ञापन

72 घंटे तक रखा था डिजिटल अरेस्ट डीएसपी विशाल कुमार ने बताया कि बीती 23 अक्तूबर को न्यू कॉलोनी निवासी अनिल कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 19 अक्तूबर को उनके पास वीडियो कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई का अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट कर दिया। 72 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट के दौरान आरोपी ने व्यापारी को मनी लॉन्ड्रिंग का आरोपी बताया आरबीआई व सीबीआई का नोटिस भेजा और गिरफ्तारी का डर दिखाया। व्यापारी को झांसे में लेकर 88 लाख रुपये खाते में डलवा लिए। उसके बाद जमानत के नाम पर 15 लाख रुपये मांगे तो व्यापारी को ठगी का आभास हुआ और उसने कॉल काटकर पुलिस को शिकायत दी। कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए पहुंची पुलिस
पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कार्रवाई शुरू की। साइबर अपराध थाना प्रभारी इंस्पेक्टर नवीन के नेतृत्व में टीम गठित कर मामले की जांच साइबर तकनीक के आधार पर शुरू की। सब इंस्पेक्टर संदीप कुमार की टीम ने जांच के दौरान मध्य प्रदेश के ग्वालियर निवासी सचिन उपाध्याय व इंदौर निवासी यश दुबे को गिरफ्तार किया। आरोपियों ने छह दिन की रिमांड पर चौकाने वाले खुलासे किए। आरोपियों की निशानदेही पर अब पुलिस ने गोरखपुर निवासी संजीव कुमार, महाराजगंज निवासी शिवाजी मौर्य को गिरफ्तार किया। इनके बाद पुलिस ने आगरा निवासी अश्वनी उर्फ लूसी, सनौली निवासी सोनू कुमार, इंदौर निवासी मनोज लुहार, आगरा निवासी रजत वर्मा, आगरा निवासी उत्कर्ष, आगरा के ताजगंज निवासी नीरज कुमार, जिला जौनपुर गोरखपुर स्थित बरडीहा निवासी अविश को गिरफ्तार किया। पहले गिरफ्तार किए गए सचिन, यश, संजीव व शिवाजी मौर्य को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह द्वारा हजारों करोड़ रुपये ठगी का अंदेशा है, जिसकी जांच की जा रही है।
नौ लाख रुपये, चार कार, मोबाइल, एटीएम व चेक बुक बरामद
साइबर पुलिस ने आरोपियों से अभी व्यापारी अनिल से ठगी किए गए नौ लाख रुपये बरामद किए हैं। इसके अलावा आरोपियों से चार कार बरामद की गई हैं, जिनमें एक टाटा सफारी, होंडा सिटी व दो मारूति सियाज कार शामिल हैं। इन कारों को आरोपियों ने ठगी के रुपयों से खरीदा था। वहीं, आरोपियों से 31 मोबाइल फोन, पांच एटीएम कार्ड, आठ चैक बुक भी बरामद की गई हैं।


1930 पर तुरंत फोन कर आर्थिक नुकसान से बचें लोग
डीएसपी विशाल कुमार ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के प्रलोभन व झांसे में न आए। वेबसाइट एवं कॉल करने वाले व्यक्ति की पहले आधिकारिक तौर पर पुष्टि करें। इसके बावजूद यदि साइबर ठगी हो जाती है तो साइबर राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर अपनी शिकायत अवश्य पंजीकृत कराएं। शिकायत पंजीकृत होते ही ठगी की राशि को बैंक खाते में होल्ड करा दिया जाता है, जिससे पीड़ित का आर्थिक नुकसान होने से बच जाता है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें