पशुओं का चारा-पानी और साफ-सफाई करने का काम करता था बच्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। गांव ढैकोला में छह साल तक बंधुआ मजदूर बनाकर घर में कैद करके बच्चे को रखने का मामला सामने आया है। 9 साल की उम्र में दो युवक बाइक पर सवार होकर आए और अपहरण करके ले गए। इकलौते बेटे को खोने के गम में मां मानसिक विक्षिप्त हो गई। पिता घर छोड़कर चले गए।
करीब 6 साल के बाद पड़ोसी व्यक्ति ने बच्चे को पशुपालक के पास से छुड़ाकर उसके परिवार से मिलवाया। एनआईटी स्थित नेहरू कॉलोनी में रहने वाले नाबालिग को छह साल पहले दो बाइक सवार मुंह पर कपड़ा बांधकर उठा ले गए थे। परिवार ने बच्चे की बहुत तलाश की लेकिन कुछ पता नहीं चला। परिवार के लोगों का आरोप है कि बच्चे का आधार कार्ड नहीं होने की वजह से उनकी शिकायत थाने में दर्ज नहीं की गई। एनआईटी नेहरू कॉलोनी से करीब 15 किलोमीटर दूर बसे गांव ढैकोला में बंधुआ मजदूर बनाकर कैद किया हुआ था। 9 साल का बच्चा पशुओं का चारा-पानी और साफ-सफाई करने का काम करता था।
अजीत रावत ने बताया कि पहले वह शहर में रहते थे लेकिन कुछ समय पहले वह गांव ढैकोला गांव में वापस रहने के लिए आए। इस दौरान बच्चे की पिटाई होते देखी। वह मदद के लिए गुहार लगा रहा था। शक होने पर पड़ताल की तो सच्चाई सामने आ गई कि बच्चा पशुपालन का नहीं, बल्कि बंधक बनाकर रखा गया है। उसके बाद अजीत रावत ने 25 मार्च को सीएम विंडो पर बच्चे को मुक्त कराने की गुहार लगाई। उसके बाद संबंधित थाने पर शिकायत आई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। उसके बाद 6 अप्रैल को बाल कल्याण परिषद के दफ्तर पहुंच गए। वहां उन्होंने अपनी अर्जी देकर पूरी कहानी सुनाई। शिकायत मिलने के मात्र तीन घंटे बाद ही बच्चे को उस घर से आजाद कराया गया। उसके बाद टीम ने बच्चे से पूछताछ की। करीब 6 साल के बाद नेहरू कॉलोनी में रहने वाली मां से मिलवाया। बाल कल्याण परिषद ने पूरे मामले में कार्रवाई के लिए तिगांव थाना पुलिस को लिखित में सूचित किया है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।