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Faridabad News: आगरा नहर में छोड़ा जा रहा औद्योगिक क्षेत्र का केमिकल युक्त पानी

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लोगों का आरोप उद्योगों पर कार्रवाई से बच रहे जिम्मेदार
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। यमुना नदी के बाद फरीदाबाद में आगरा नहर का पानी जहरीला हो रहा है। फरीदाबाद स्थित आईएमटी औद्योगिक क्षेत्र में बने 10.5 एमएलडी का केमिकल युक्त गंदा पानी बिना ट्रीट किए नहर में छोड़ा जा रहा है। इसी जहरीले पानी से हजारों एकड़ जमीन में लगे फसल की सिंचाई हो रही है। इससे फसल बर्बाद हो रहे है। वहीं, जिम्मेदार अधिकारी उद्योगों पर कार्यवाही करने की बजाय चुप्पी साधे बैठे है।

फरीदाबाद में बहने वाली 17 किलोमीटर लंबी आगरा नहर एक गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है। नहर का पानी इतना काला है कि यहां से अवागमन करने वाले लोग नाक और मुंह ढकने को मजबूर है। वहीं, ग्रेटर फरीदाबाद निवासी एके गौड़ ने बताया कि आगरा कैनाल से तकरीबन यूपी और हरियाणा के करीब 150 से175 गांव सटे हुए हैं जो आगरा कैनाल से पानी लेकर अपने खेतों की सिंचाई करते हैं।
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आगरा नहरों को फरीदाबाद, गुरुग्राम, मेवात और यूपी के आगरा जिले में खेतों की सिंचाई के लिए ही बनाया गया था लेकिन इन नहरों में अनुपचारित औद्योगिक और सीवर अपशिष्ट के अनियंत्रित रूप से छोड़े जाने के कारण पानी की गुणवत्ता खराब हो गई है। इसके अलावा शिकायतकर्ता नरेंद्र श्योरान ने बताया कि जिले में अधिकारियों की नाक के नीचे नाले, सीवर और उद्योगों का पानी नहर में बिना ट्रीट किए छोड़ा जा रहा है। इसका पानी न केवल किसानों की फसल खराब हो रही है बल्कि पानी में टीडीएस की मात्रा बढ़ने से लोग नई ओर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे है। वह संबंधित मामले की शिकायत हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एचएसआईआईडीसी) और प्रदूषण नियंत्रण विभाग में कर चुके है लेकिन अधिकारी चुप्पी साधे बैठे है।

ओखला बैराज से निकलती हैं गुरुग्राम और आगरा नहर
जिले में गुरुग्राम और आगरा दो कैनाल बहती हैं। इनसे करीब 45 रजवाहे निकलते हैं। इन कैनाल में दिल्ली के ओखला बैराज से पानी छोड़ा जाता है। यमुना में दिल्ली के करीब 66 नालों का गंदा केमिकल युक्त पानी डाला जाता है। दिल्ली के गंदे पानी के सात रजवाहों पर बड़ी मुश्किल से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए गए हैं। अन्य नालों पर कोई ट्रीटमेंट प्लांट नहीं है, जिनका सीधा पानी यमुना में डाला जा रहा है। यह दूषित पानी रिसकर भूजल को भी प्रदूषित कर रहा है। इससे नहरों के नजदीक बसे गांवों के लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। यही वजह है कि यहां अधिकतर लोग बोतल बंद पानी खरीद कर पीते हैं। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार आगरा नहर में बहने वाले पानी की बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) की मात्रा फरीदाबाद में काफी अधिक है। जो किसी भी व्यक्ति को मारने के लिए काफी है। वहीं, संबंधित मामले को लेकर एचएसआईआईडीसी विभाग के महाप्रबंधक हरी कृष्णा भारद्वाज से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
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वर्जन
आगरा या गुरुग्राम नहर में प्रदूषित पानी छोड़ा जा रहा है तो उसकी जांच करवाई जाएगी। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - दिनेश कुमार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी, बल्लभगढ़।
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