संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। साइबर ठगों के जाल में आम लोगों की तरह भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी भी फंस गईं। पीड़िता ने बेटे को कनाडा भेजने के लिए एजेंट से फोन पर संपर्क किया था, लेकिन नंबर एजेंट की बजाय साइबर ठग का निकला और एक लाख रुपये गंवा बैठी। घटना के समय पीड़िता फरीदाबाद में तैनात थीं, फिलहाल मुंबई के बांद्रा में इनकम टैक्स कमिश्नर के पद पर तैनात हैं। साइबर थाना एनआईटी पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
आईआरएस अधिकारी जीनिया हांडा ने 30 अगस्त को पुलिस को दी शिकायत में बताया कि दो जून को बेटे को कनाडा भेजने के लिए वह एजेंट का नंबर तलाश रही थीं। एक दोस्त द्वारा दिए गए एजेंट के नंबर पर उन्होंने फोन कर कनाडा के लिए टिकट बुक करने की बात कही। एजेंट ने अपना नाम लविश जैन बताया और टिकट के लिए 1.10 लाख रुपये ट्रांसफर करने को कहा। उन्होंने ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कर दिए। आरोप है पैसे मिलने के कई घंटे बाद तक भी टिकट नहीं भेजा गया। आरोपी ने उनका फोन भी उठाना बंद कर दिया। ठगी का अहसास होने पर उन्होंने पुलिस को शिकायत दी। साइबर थाना एनआईटी पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर निगम कर्मी से 32.76 हजार ठगे
फरीदाबाद। साइबर ठगों ने क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा देकर एसजीएम नगर निवासी निगम कर्मी से 32.67 हजार रुपये ठग लिए। ठगों ने बैंककर्मी बनकर मोबाइल पर एप डाउनलोड करवाया और कार्ड की जानकारी भरवाकर क्रेडिट कार्ड से पैसे ट्रांसफर कर लिए। साइबर थाना एनआईटी पुलिस ने केस केस कर लिया है।
एनआईटी सी-ब्लॉक निवासी पवन तंवर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह गुरुग्राम नगर निगम में टेक्नीशियन के पद पर तैनात हैं। 10 नवंबर को उसके पास एक अंजान नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को बैंककर्मी बताते हुए कहा आपके कार्ड पर लिमिट बढ़ाने का ऑफर है। हां करने पर आरोपी ने मैसेंजर पर एक एप का लिंक भेजा और उसे डाउनलोड करने को कहा। एप में पूछी गई कार्ड की जानकारी भरने के बाद उनके फोन पर एक ओटीपी आया और उनके कार्ड से 32.67 हजार रुपये कट गए। पीड़ित का दावा है कि उन्होंने ओटीपी किसी से भी साझा नहीं किया था। पुलिस मामले की जांच कर रही है। संवाद