सांस नाम से होगा कैंपेन, घर-घर जाकर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जाएगी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बुधवार को विश्वभर में मनाए जाने वाले विश्व निमोनिया दिवस के दिन से सरकारी अस्पतालों की ओर से लोगों को जागरूक करने के लिए सांस (सोशल अवेयरनेस एंड एक्शन प्लान टू न्यूट्रीलाइज निमोनिया सक्सेसफुली) नाम से कैंपेन चलाया जाएगा। कैंपेन के तहत निमोनिया से बचाने के लिए कई चीजें बताई जाएंगी।
इनमें सुरक्षा, सतर्कता और इलाज तीनों ही चीजों के बारे में जागरूक किया जाएगा। अस्पतालों में मौजूद आशा, एएनएम और सीएचओ लोगों के घरों में जाकर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करेंगीं। इनमें बच्चों की सांसों को देखा जाएगा कि वह बहुत तेज सांसें तो नहीं ले रहा है, जिससे निमोनिया का खतरा भांपा जा सके। अगर ऐसी कोई समस्या है तो उसे तुरंत इलाज के लिए अस्पताल भेजा जाएगा। साथ ही टीकाकरण के बारे में भी अधिक से अधिक जागरूक किया जाएगा।
बतादें कि सांसों के अलावा बच्चे को बार-बार उल्टी आना और सीने में जकड़न महसूस होना यह निमोनिया के लक्षण हो सकते हैं। शहर के एक अस्पताल में अक्तूबर माह से अब तक प्रतिदिन औसतन 15-20 निमोनिया के बच्चे आ रहे हैं। इनमें 13-15 बच्चों की आयु 5 वर्ष से कम है। शहर के जिला नागरिक अस्पताल बीके में प्रतिदिन निमोनिया के करीब 10 मामले आ रहे हैं। इनमें से करीब 8 बच्चों की आयु 5 वर्ष से कम है। वहीं शहर के कई शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (यूपीएचसी) में तो 20 से 25 बच्चे औसतन आ रहे हैं। इनमें नांगला के यूपीएचसी में प्रतिदिन 22 से 25 मामले आ रहे हैं। वहीं एसी नगर में 18 से 20 और डबुआ कॉलोनी स्थित यूपीएचसी में प्रतिदिन निमोनिया के करीब 20 मामले आ रहे हैं। डॉक्टरों ने बताया कि लगातार एनसीआर में बढ़ रहे प्रदूषण स्तर के चलते इन मामलों में और इजाफा हुआ है।
वर्जन
सरकार और अस्पताल की ओर से निमोनिया की रोकथाम के लिए लगातार कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में 12 नवंबर से सांस कार्यक्रम के तहत अस्पताल के सभी डॉक्टर, आशा, एएनएम और सीएचओ लोगों को जागरूक करेंगी और उनकी जांच भी करेंगी। -
मंजीत त्यागी, डॉक्टर, नांगला शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र