आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट के बाद एफएमडीए ने संभाली कमान
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर के सीवेज प्रबंधन में लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता पर अब विराम लग गया है। तकनीकी जांच पूरी होने के बाद फरीदाबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी ने मिर्जापुर और प्रतापगढ़ स्थित दोनों सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का औपचारिक रूप से टेकओवर कर लिया है।
आईआईटी रुड़की की थर्ड पार्टी ऑडिट रिपोर्ट मिलने के बाद यह कदम उठाया गया है। अब एफएमडीए इन प्लांटों के अपग्रेड और शोधित पानी के बेहतर उपयोग की योजना पर काम शुरू कर चुका है। करीब 180 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) की संयुक्त क्षमता वाले ये दोनों प्लांट शहर की ड्रेनेज व्यवस्था और यमुना में गिरने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने की दृष्टि से बेहद अहम माने जा रहे हैं। मिर्जापुर प्लांट की क्षमता 80 एमएलडी और प्रतापगढ़ की 100 एमएलडी है। पिछले कई वर्षों से निर्माण और ट्रायल संचालन के दौर से गुजर रहे इन प्लांटों को लेकर तकनीकी गुणवत्ता और प्रदर्शन पर सवाल उठते रहे थे। इसी पृष्ठभूमि में एफएमडीए ने स्वतंत्र विशेषज्ञ एजेंसी से जांच कराने का निर्णय लिया था।
आईआईटी रुड़की की टीम ने दोनों प्लांटों की कार्यक्षमता, मशीनरी की स्थिति, ट्रीटेड पानी की गुणवत्ता और डिजाइन क्षमता के अनुरूप संचालन की जांच की। रिपोर्ट के आधार पर एफएमडीए ने नगर निगम से हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी की। अधिकारियों का कहना है कि अब संचालन की जिम्मेदारी एक ही एजेंसी के पास होने से जवाबदेही स्पष्ट होगी और तकनीकी कमियों को चरणबद्ध तरीके से दूर किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार ऑडिट में कुछ सुधारात्मक सुझाव भी दिए गए हैं जिन पर अमल के लिए अपग्रेडेशन प्लान तैयार किया जा रहा है। इसमें ऑटोमेशन बढ़ाने, ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम मजबूत करने और स्लज मैनेजमेंट को बेहतर बनाने जैसे बिंदु शामिल हैं।
शोधित पानी के पुन: उपयोग पर फोकस
अब तक मिर्जापुर प्लांट से निकलने वाला शोधित पानी रामपुर डिस्ट्रीब्यूटरी के जरिये सिंचाई में उपयोग हो रहा था जबकि प्रतापगढ़ प्लांट का एक बड़ा हिस्सा नालों में बह जाता था। एफएमडीए की योजना है कि दोनों प्लांटों के पानी का अधिकतम उपयोग औद्योगिक इकाइयों, निर्माण कार्यों, पार्कों की सिंचाई और हरित पट्टियों के लिए किया जाए। इससे भूजल दोहन पर दबाव कम होगा और पेयजल स्रोतों की रक्षा में मदद मिलेगी। शहर में तेजी से बढ़ती आबादी और औद्योगिक विस्तार को देखते हुए जल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे में 180 एमएलडी क्षमता का प्रभावी उपयोग फरीदाबाद के लिए रणनीतिक महत्व रखता है।
ड्रेनेज संकट से राहत की उम्मीद
बरसात के दिनों में कई कॉलोनियों और मुख्य सड़कों पर सीवेज ओवरफ्लो की समस्या सामने आती रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि एसटीपी पूरी क्षमता से और मानकों के अनुरूप चलें तो सीवेज बैकफ्लो और नालों में गंदगी की मात्रा कम की जा सकती है। इससे यमुना में गिरने वाले अपशिष्ट पर भी नियंत्रण संभव होगा।
वर्जन
सर्वे के बाद दोनों एसटीपी एफएमडीए ने औपचारिक रूप से अपने अधीन ले लिए हैं। - विशाल बंसल, चीफ इंजीनियर एफएमडीए