फरीदाबाद। जिले में बर्ड फ्लू की आशंका को देखते हुए पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। विभाग की टीम ने शनिवार को गांव धौज और बड़खल स्थित पॉल्ट्री फार्मों का निरीक्षण किया। फार्म संचालकों के साथ बैठक भी की। उन्हें फ्लू से बचाव के लिए जागरूक किया और सावधानियां बताई गईं। अधिकारियों ने कहा कि फ्लू से संबंधी कोई लक्षण नजर आए तो वह तुरंत इसकी जानकारी नजदीकी पशु चिकित्सक व पशु पालन विभाग को दें।
पशुपालन विभाग की ओर से बर्ड फ्लू को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया। पॉल्ट्री फार्म मालिकों व घरेलू मुर्गी पालन करने वालों को बर्ड फ्लू बीमारी के बारे में अहम जानकारी दी। जिला पशुपालन अधिकारी नीलम आर्य ने मुर्गी पालकों से विशेष एहतियात बरतने के लिए कहा। उन्होंने गांव चंदावली, जाजरू, मलेरना आदि गांव वासियों को बर्ड फ्लू के लक्षण के प्रति जागरूक किया।
जिले में गांव धौज और बड़खल सहित आठ छोटे-बड़े पॉल्ट्री फार्म हैं। इन सभी जगहों पर करीब 20 हजार मुर्गियों का पालन होता है। यहां से मुर्गियों और अंडे की सप्लाई होती है, जिसके बाद इन्हें खुदरा बाजार में बेचा जाता है। वहीं बर्ड फ्लू को लेकर कई राज्यों में खलबली मची है। राज्य सरकार ने फ्लू को लेकर सभी जिलों को जांच और निगरानी बनाए रखने के आदेश जारी किए हैं। पशुपालन विभाग के अधिकारी भी हरकत में आए हैं। जिले में सतर्कता बरती जा रही है। पॉल्ट्री फार्म का रोजाना निरीक्षण किया जा रहा। प्रतिदिन इन फार्मों पर नजर रखी जा रही है। कारोबार से जुड़े लोगों को जागरूक किया जा रहा है। शनिवार को पशु पालन अधिकारियों ने धौज पॉल्ट्री फार्म का दौरा किया। निरीक्षण के दौरान यहां व्यवस्था ठीक देखने को मिली।
जिला पशुपालन अधिकारी नीलम आर्य ने कहा कि पॉल्ट्री फार्मों संचालकों को साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने के आदेश जारी किए गए हैं। बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर पॉल्ट्री फार्म में पूरी तरह रोक है। क्षेत्र में ठंड व अन्य किसी कारण से यदि मुर्गियों के बीमार होने व मरने का मामला सामने आता है तो इसकी जानकारी पशु चिकित्सक को देनी होगी। इसके अलावा विभाग में शिकायत की जा सकती है।
पक्षियों से मनुष्य में भी बीमारी फैलने का खतरा : नीलम आर्य
जिला पशुपालन अधिकारी नीलम आर्य ने बताया कि अभी तक जिले में किसी भी पक्षी में बर्ड फ्लू का कोई लक्षण नहीं मिला है। यह एवियन इनफ्लुएंजा वायरस एच5एन1 से पक्षियों में फैलता है। पक्षियों से मनुष्य में भी फैलने का खतरा रहता है। मुख्य रूप से मुर्गी, टर्की मोर और बतख में संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। इस बीमारी में पक्षियों को बहुत तेज बुखार हो जाता है, बहुत तेज प्यास लगती है, चलने फिरने में बहुत दिक्कत होती है गर्दन टूटने लगती है। पक्षी 24 घंटे के दौरान मर जाता है। पॉल्ट्री फार्म और घरेलू मुर्गी पालन करने वाले लोगों को अपने हाथ में दस्ताने और मुंह पर मास्क अवश्य लगाना चाहिए। कीटाणु नाशक घोल का छिड़काव करें। किसी भी तरीके से बाहर से आने वाले वाहन को भी कीटाणु नाशक घोल से गुजरने की सलाह दी गई है। सभी मुर्गी पालकों से बाहर से किसी भी तरीके की पॉल्ट्री से संबंधित सामान मंगवाने से भी परहेज करने की सलाह दी है।