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मनोज की हत्या के फिराक में था बिन्नू गैंग

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फरीदाबाद (कैलाश गठवाल)। क्राइम ब्रांच सेक्टर-17 और 30 ने अलवर से बिन्नू गैंग के सदस्यों को पकड़ कर ना केवल सलाखों के पीछे पहुंचाया है, बल्कि शहर में एक और हत्या की वारदात को होने से रोक दिया है। क्राइम ब्रांच ने अलवर के पकड़े चारों आरोपियों को चार दिन के रिमांड पर हैं। इस दौरान आरोपियों ने कई बड़े खुलासे किए हैं। सूत्रों के मुताबिक रिमांड के दौरान आरोपियों ने बताया है कि इस बार उनका टारगेट कुलभूषण का बड़ा भाई मनोज नागर था। मनोज इन दिनों एक हत्या के मामले में जेल में बंद है। आरोपियों को पता लगा कि जल्द ही मनोज की जमानत होने वाली है। मनोज के बाहर आते ही उसे ठिकाने लगाने का प्लान आरोपी बना चुके थे। वह वारदात को अंजाम देने के बाद कुछ दिनों के लिए शहर से दूर भागने की फिराक में थे।
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डर पैदा करने के लिए हथौड़े से लोगों के तोड़े थे हाथ पैर
करीब दस साल पहले गांव नचौली निवासी मनोज नागर क्राइम से जुड़ा। उसे पलवल में हुई एक युवक की हत्या मामले में जेल हो गई। हत्या के अलावा कई अन्य मामलों में उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज है। वह जेल से सक्रिय होकर गैंग सरगना बना। इधर, उसका भाई कुलभूषण उसके काम को संभालता था। गांव भैंसरावली निवासी अनिल उर्फ अन्नी और उसका भाई वीरेंद्र उर्फ बिन्नू भी ऐसी ही वारदातों में सक्रिय हुए। कुलभूषण ने फ्रेक्चर गैंग के नाम से एक गिरोह बनाया। यह गिरोह हथौड़े से लोगों के हाथ पैर तोड़ देता और उसकी वीडियो बनाकर वायरल कर देता। ऐसे में लोगों में उनका खौफ पैदा हुआ। इस फार्मूले पर उन्हें आसानी से रंगदारी मिल सके, ऐसी योजना थी। वहीं, अन्नी, बिन्नू गैंग मनोज मांगरिया के संपर्क में आकर लोगों से रंगदारी मांग रहा था।
जेल से शुरू हुई थी दोनों गैंग की दुश्मनी
एक मामले में अनिल उर्फ अन्नी को जेल हुई। जेल में मनोज नागर पहले से बंद था। यहां दोनों की किसी बात को लेकर लड़ाई हो गई। इस बीच अनिल जमानत पर बाहर आ गया। मनोज के इशारे पर उसका भाई कुलभूषण अनिल को मारने की फिराक में था। इसके बाद 12 फरवरी 2020 को कुलभूषण और उसके साथियों ने वर्ल्ड स्ट्रीट में अनिल उसके दोस्त भूरा पर राउंड फायर किए। इस मामले में भूरा की इलाज के दौरान टांग काटनी पड़ी, जबकि अनिल की मौत हो गई। इसके बदले में कुलभूषण के छोटे भाई रॉकी की हत्या बिन्नू और उसके साथियों ने कर दी।
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आरोपियों को अलवर और कोटा लेकर जाएगी क्राइम ब्रांच
चारों आरोपी रॉकी की हत्या के बाद दिल्ली भाग गए और वहां एक फ्लैट किराए पर लेकर रहने लगे। इसके बाद सभी राजस्थान के कोटा चले गए। यहां भी कुछ दिनों तक रहने के बाद आरोपियों को पुलिस का डर सताने लगा। इसके बाद सभी अलवर में छिपकर रहने लगे। इस दौरान आरोपियों ने कई अलग अलग जगह से रुपयों का भी इंतजाम किया। आरोपी फरीदाबाद में पुलिस की गतिविधियों पर नजर भी रख रहे थे। अब पुलिस आरोपियों से हथियार और अन्य सामान बरामद करने के लिए उन्हें अलवर व राजस्थान के अन्य जिलों में लेकर जाएगी। (संवाद)
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