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Faridabad News: बाटा फ्लाईओवर का जाम बढ़ा रहा सेक्टर-11 का प्रदूषण

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- मरम्मत के लिए नीलम फ्लाईओवर की एक लेन बंद
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- बाटा फ्लाईओवर और ओल्ड फरीदाबाद अंडरपास की ओर डायवर्ट हो रहे वाहन
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। बाटा फ्लाईओवर का जाम सेक्टर-11 क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ा रहा है। जिससे क्षेत्र का वायु गुणवत्ता सूचकांक लगातार 300 से अधिक बना है। वाहनों से निकलते धुएं के कारण लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है, जिससे लोग बेहद परेशान हैं। ऐसे में डॉक्टरों ने लोगों सावधानी बरतने की सलाह दी है।
शहर की लाइफ लाइन कहे जाने वाले नीलम फ्लाईओवर पर पिछले एक माह से मरम्मत कार्य चल रहा है। एक तरफ की सड़क को बंद कर दिया गया। केवल एक साइड ही वाहनों की आवाजाही के लिए खोली गई है। हालांकि काम शुरू होने से अधिकारियों का दावा था कि 15 दिन में काम पूरा कर सड़क को खोल दिया जाएगा, लेकिन अब तक पूरा नहीं हुआ। ऐसे में वाहनों के दबाव को कम करने के लिए पुलिस की ओर से ट्रैफिक को बाटा और ओल्ड फरीदाबाद अंडरपास की तरफ डायवर्ड किया गया। बाटा फ्लाईओवर नजदीक होने कारण वाहन चालक इसका इस्तेमाल अधिक करते हैं, जिससे वाहनों का दबाव काफी बढ़ गया है। वाहनों के दबाव के कारण जाम हाईवे स्थित बाटा चौक पर जाम लगता है। जिससे वायु प्रदूषण में बढ़ोत्तरी होती दिखी। सेक्टर-11 का वायु गुणवत्ता सूचकांक 330 दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से जारी सूची के अनुसार फरीदाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक 254 और बल्लभगढ़ का 199 दर्ज किया गया। अलग-अलग क्षेत्रों की बात करें तो एनआई का वायु गुणवत्ता सूचकांक 199 और सेक्टर-30 का 230 एक्यूआई दर्ज गया।
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फेंफड़ों को छलनी कर रही प्रदूषित हवा
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार पांडे ने बताया कि वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर फेंफड़ों पर पड़ता है। इससे लोगों को खांसी अस्थमा या सांस संबंधी अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में प्रदूषित हवा में सांस लेने से आंखों में जलन, सर्दी-जुकाम, सिरदर्द, उल्टी जैसी आदि बीमारियों के रोगी की संख्या 10 से 15 फीसदी बढ़ गई है। निजी अस्पताल के श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. रोहित मुखर्जी ने कहा कि प्रदूषित हवा में बेहद बारीक पार्टिकल्स पाए जाते हैं, जिन्हें पीएम 2.5 पार्टिकल कहते हैं। सांस लेने के दौरान ये सीधे फेंफड़ों तक पहुंचकर नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड और ओजोन कई तरह से शरीर को डैमेज कर रहे हैं।
नीलम फ्लाईओवर पर चल रहे कार्य की वजह से बाटा फ्लाईओवर पर वाहनों का दबाव दोगुना बढ़ गया है। इससे प्रदूषण का स्तर 300 के आसपास बना हुआ है।
- अकांक्षा तंवर, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रक
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