फरीदाबाद। आल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन (एआईबीईए) के आह्वान पर मंगलवार को बैंकों में हड़ताल रखी गई है। हालांकि, चुनाव के कारण जिले में 144 लागू होने के कारण कर्मचारी विरोध प्रदर्शन नहीं कर सके। क्लर्कों के हड़ताल पर रहने से एक दिन में शहर में करीब 10 करोड़ रुपये का लेन देन प्रभावित रहा है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी पैसे जमा करने और निकालने आए लोगों को उठानी पड़ी। उन्हें बैंकों से खाली हाथ वापस घर लौटना पड़ा।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय, बैंकों की ब्रांचों को बंद करने, कर्मचारियों की छटनी के विरोध में इंडियन बैंक सहित कई बैंकों में हड़ताल रही। यह हड़ताल केवल क्लर्क के पदों पर कार्यरत कर्मचारियों की थी। इसमें अधिकारी शामिल नहीं रहे। तीन दिनों की छुट्टी के बाद मंगलवार को जब बैंक खुले तो हड़ताल के कारण लेन देन प्रभावित रहा। सरकारी व निजी क्षेत्र की अन्य बैंकों में अन्य कर्मचारियों के सहारे काम चला लिया गया, मगर इंडियन बैंक में सबसे ज्यादा काम प्रभावित हुआ।
बैंक के एक अधिकारी ने बताया कि इंडियन के बैंक की शहर में करीब 10 ब्रांच है। हड़ताल के कारण करीब 10 से 12 करोड़ रुपये का कैश लेनदेन नहीं हो सका। हरियाणा बैंक इंप्लाइज फेडरेशन के चेयरमैन आरके गुलाटी ने बताया कि पिछले दिनों सरकार ने बैंक ऑफ बडौदा और देना बैंकों का विलय किया। इस दौरान सरकार ने कहा कि था कि बैंकों की ब्रांच बंद नहीं की जाएंगी। कर्मचारियों की छटनी नहीं की जाएगी। इसके बावजूद की जा रही है।
अब सरकार इंडियन बैंक और इलाहाबाद बैंक का विलय करने जा रही है। इससे करीब आठ हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। हमारी मांग है कि सरकार बैंकों के विलय का फैसला वापिस ले। बैंकों में छटनी पर रोक लगाए।