फरीदाबाद का एक्यूआई रहा 197, लोगों को सांस लेने में दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बल्लभगढ़ सोमवार को देश में सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार यहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 315 रहा, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। बढ़ते प्रदूषण स्तर के कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा।
सीपीसीबी की वेबसाइट पर जारी रिपोर्ट के मुताबिक देश के 239 शहरों में दर्ज प्रदूषण स्तर में बल्लभगढ़ सबसे अधिक प्रदूषित रहा। वहीं, फरीदाबाद का एक्यूआई 197 दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग चार गुना अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक गतिविधियां, वाहनों का धुआं और ईंट-भट्ठों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। फरीदाबाद और आसपास के क्षेत्रों में संचालित ईंट-भट्ठों को कोयले के स्थान पर बायोमास आधारित ईंधन अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों के अनुसार फरीदाबाद में लगभग 100 और पलवल में भी करीब 100 ईंट-भट्ठे संचालित हो रहे हैं। फिलहाल सभी भट्ठों का संचालन बंद करा दिया गया है, लेकिन मार्च से इनके दोबारा शुरू होने की संभावना है। क्षेत्रीय अधिकारी हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के संदीप सिंह ने बताया कि सभी संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि संचालन शुरू करने से पहले बायोमास ईंधन का उपयोग सुनिश्चित करें। नियमों की अनदेखी करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
बायोमास एक जैविक ईंधन है, जो कृषि अवशेष, लकड़ी का बुरादा, धान की भूसी, गन्ने की खोई और सरसों के डंठल जैसे पदार्थों से तैयार किया जाता है। इसे प्रोसेस कर ब्रिकेट्स या पेलेट्स के रूप में उपयोग किया जाता है। जानकारों के अनुसार कोयले की तुलना में बायोमास में सल्फर की मात्रा कम होती है, जिससे सल्फर डाइऑक्साइड का उत्सर्जन घटता है। साथ ही इसका कार्बन चक्र संतुलित माना जाता है, क्योंकि जलने पर उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड पहले पौधों द्वारा अवशोषित की जा चुकी होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सभी ईंट-भट्ठे बायोमास आधारित ईंधन अपनाते हैं तो क्षेत्र में कणीय प्रदूषण में कमी आएगी और वायु गुणवत्ता में सुधार संभव है। इससे किसानों को भी लाभ होगा, क्योंकि फसल अवशेषों की मांग बढ़ेगी और पराली जलाने की घटनाओं में कमी आ सकती है। प्रशासन का मानना है कि उद्योग, सरकार और किसानों के सामूहिक प्रयास से यह पहल फरीदाबाद को स्वच्छ हवा की दिशा में आगे बढ़ाने में कारगर साबित होगी।