फरीदाबाद। शस्त्र लाइसेंस बनवाने और हथियार उपलब्ध कराने के नाम पर 54 लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने के आरोपी ओमबीर की नियमित जमानत याचिका अतिरिक्त सत्र अदालत ने खारिज कर दी। अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं, मामले का एक सह-आरोपी अभी गिरफ्तार नहीं हुआ है और जमानत मिलने पर गवाहों को प्रभावित करने व साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका बनी हुई है।
अदालत के आदेश के अनुसार, सदर बल्लभगढ़ थाना में 28 मई को दर्ज प्राथमिकी में जाजरू निवासी मनीष डागर ने शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप है कि उसका भाई कुलवंत डागर, जो वर्ष 2015 से सेना में कार्यरत है, को आरोपी ओमबीर ने परिचितों के माध्यम से शस्त्र लाइसेंस बनवाने और पंजाब के फाजिल्का स्थित न्यू पंजाब गन हाउस से हथियार दिलाने का झांसा दिया। इसके लिए दो किस्तों में 95 हजार लिए गए। बाद में ओमबीर और सह-आरोपी हरीश कुमार ने हथियार उपलब्ध कराने के नाम पर 1.73 लाख बैंक खाते में और 2.47 लाख नकद भी ले लिए। आरोप है कि फर्जी तरीके से शस्त्र लाइसेंस तैयार कर उसी आधार पर हथियार उपलब्ध कराया गया। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि इसी तरह 5-6 अन्य लोगों के फर्जी लाइसेंस बनवाए गए और करीब 54 लोगों से शस्त्र लाइसेंस व हथियार दिलाने के नाम पर रुपये लिए गए। पुलिस ने ओमबीर को 30 मई को गिरफ्तार किया था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार ने आदेश में कहा कि केवल चालान पेश होना जमानत का आधार नहीं हो सकता। मामले के प्रमुख गवाहों की गवाही अभी शेष है और सह-आरोपी अमजिद खान की गिरफ्तारी भी बाकी है। ऐसे में आरोपी को जमानत देने से मुकदमे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इन्हीं आधारों पर अदालत ने नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। संवाद