अदालत ने प्रथम दृष्टया साजिश में भूमिका मानते हुए राहत देने से किया इन्कार
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। विदेश से व्हाट्सएप कॉल के जरिए कारोबारियों से रंगदारी मांगने के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप कुमार गर्ग की अदालत ने आरोपी दीपक गोयल की जमानत याचिका 31 जुलाई को खारिज कर दी है। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया आरोपी की भूमिका सामने आने का हवाला देते हुए उसे राहत देने से इन्कार कर दिया।
मामला मई और जून के दौरान जिले के 16 कारोबारियों को विदेशी व्हाट्सएप नंबरों से मिली रंगदारी की धमकियों से जुड़ा है। कॉल करने वाले ने खुद को गैंगस्टर रणदीप मलिक बताते हुए रुपये नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पहले दर्ज एक मामले में दीपक गोयल को जमानत मिल गई थी। बाद में जांच के दौरान सामने आए नए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने दूसरा मुकदमा दर्ज कर उसे दोबारा गिरफ्तार किया। तब से वह न्यायिक हिरासत में है।
पुलिस का आरोप है कि पूछताछ में दीपक गोयल ने स्वीकार किया कि उसने आईबी अधिकारी सिकंदर, फरार आईबी अधिकारी संदीप राणा और सोनीपत निवासी दीपक जुलाना के साथ मिलकर साजिश रची थी। जांच में यह भी सामने आया कि कारोबारियों के नाम, मोबाइल नंबर और कारोबार संबंधी जानकारी कथित तौर पर सिकंदर को उपलब्ध कराई गई, जिसे आगे विदेश में बैठे गैंगस्टर तक पहुंचाया गया। पुलिस का दावा है कि इससे संबंधित एक पर्ची भी बरामद हुई है।
वहीं, बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि दीपक गोयल का सिकंदर से केवल पैसों के लेनदेन का संबंध था और उसे पेशेवर प्रतिद्वंद्विता के चलते झूठा फंसाया गया है। हालांकि, पुलिस ने कॉल डिटेल, डिजिटल साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए आरोपी की संलिप्तता बताई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी।