अदालत ने कहा- प्रथम दृष्टया आरोपी गिरोह की मुख्य साजिशकर्ता, गवाहों को प्रभावित करने की आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। दुष्कर्म केस में फंसाने का डर दिखाकर 33 लाख रुपये वसूलने के आरोप वाले चर्चित हनी ट्रैप मामले में अदालत ने आरोपी पिंकी उर्फ संध्या की चौथी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार की अदालत ने 15 जुलाई को दिए आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपी कथित हनी ट्रैप गिरोह की मुख्य साजिशकर्ता प्रतीत होती है।
उसके रिहा होने पर गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका है। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपी ऐसे अपराध करने की अभ्यस्त भी दिखाई देती है। मामला थाना सेक्टर-17 में 26 सितंबर 2024 को दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार शिकायतकर्ता धीरज गुप्ता ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में उसे एक कथित हनी ट्रैप गिरोह ने झूठे दुष्कर्म के मामले में फंसाया। शिकायत में कहा गया कि आरोपी नरेश नरवत ने मामला रफा-दफा कराने के नाम पर 50 लाख रुपये की मांग की थी, जिसके बाद शिकायतकर्ता ने 33 लाख रुपये दिए। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि जिस महिला के नाम पर दुष्कर्म का मामला बताया गया, उससे उसकी कभी मुलाकात तक नहीं हुई।
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि पिंकी उर्फ संध्या 19 नवंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में है और शिकायतकर्ता की गवाही में विरोधाभास है, इसलिए उसे नियमित जमानत दी जाए। वहीं, राज्य पक्ष और शिकायतकर्ता के अधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए आरोपी को पूरे षड्यंत्र की मुख्य साजिशकर्ता बताया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि लोगों को झूठे दुष्कर्म मामलों में फंसाकर बाद में समझौते के नाम पर बड़ी रकम वसूलने की साजिश में उसकी केंद्रीय भूमिका रही है। ऐसे में इस स्तर पर उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।