उल्लास परीक्षा में 750 से अधिक अभ्यर्थी हुए शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सीखने की कोई उम्र नहीं होती। यह बात रविवार को जिले में आयोजित उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम की परीक्षा में देखने को मिली। किसी के हाथ में पहली बार परीक्षा की कॉपी थी तो कोई उम्र के इस पड़ाव में पढ़ाई का सपना पूरा करने पहुंचा। परीक्षा केंद्रों पर 75 साल तक के बुजुर्ग भी नजर आए। उनके चेहरे पर परीक्षा देने का उत्साह और खुशी साफ दिखाई दे रही थी।
जिलेभर में आयोजित परीक्षा में 750 से अधिक निरक्षर अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल रहे, जो बचपन में किसी कारण से स्कूल नहीं जा सके। अब उल्लास कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें पढ़ना-लिखना और बुनियादी गणना सिखाई जा रही है। परीक्षा में अभ्यर्थियों ने सीखे हुए ज्ञान के आधार पर सवालों के जवाब दिए। कई केंद्रों पर बुजुर्ग अभ्यर्थी परीक्षा को लेकर काफी उत्साहित दिखाई दिए। उनका कहना था कि उम्र भले ही पढ़ाई शुरू करने में आड़े आई हो, लेकिन सीखने की इच्छा कभी खत्म नहीं हुई।
उल्लास कार्यक्रम का उद्देश्य उन लोगों को साक्षर बनाना है, जो शिक्षा से वंचित रह गए। अभियान के तहत उन्हें रोजमर्रा के काम में जरूरी पढ़ने, लिखने और गणना का ज्ञान दिया जाता है। परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे अभ्यर्थियों ने यह संदेश भी दिया कि पढ़ाई केवल बच्चों के लिए नहीं है। अगर सीखने की इच्छा हो तो जिंदगी के किसी भी पड़ाव पर नई शुरुआत की जा सकती है।
बचपन में पढ़ाई नहीं कर सकी, लेकिन अब पढ़ने-लिखने और सीखने का मौका मिला है। -प्रेमा बाई, अभ्यर्थी
उम्र भले ही 70 साल से अधिक हो गई है, लेकिन सीखने की इच्छा आज भी है। -धरमवती,अभ्यर्थी
उल्लास कार्यक्रम का उद्देश्य हर व्यक्ति को साक्षर बनाना है। परीक्षा के माध्यम से अभ्यर्थियों की पढ़ने, लिखने और गणना की क्षमता परखी गई।-धर्मेंद्र अधाना, समन्वयक, उल्लास कार्यक्रम