कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की ओर से कर्मचारियों का लंबे समय से भविष्य निधि जमा नहीं करने वाले 29 संस्थानों के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया है। इससे पहले भी ईपीएफओ ने इस धोखाधड़ी के लिए 50 बड़ी कंपनियों को अरेस्ट वारंट जारी किया था, जिनसे एक करोड़ रुपये से अधिक की वसूली कर ली गई है।
नियम कहता है कि कर्मचारी भविष्य निधि में पंजीकृत कंपनियों को हर माह कर्मचारी के वेतन का 12 प्रतिशत ईपीएफओ में जमा करना होता है और इतना ही प्रतिशत कंपनी की तरफ से भी कर्मचारी के खाते में जमा किया जाना चाहिए। ईपीएफओ की जांच में सामने आया कि शहर में 696 कंपनियों ने पीएफ की राशि कर्मचारी के पीएफ खाते में जमा नहीं की गई। ये कंपनियां नियमों का उल्लंघन कर पीएफ के नाम पर कर्मचारियों से ठगी कर रही हैं। ऐसी कंपनियों के खिलाफ संगठन ने कार्रवाई तेज कर दी है और अरेस्ट वारंट जारी किया है। हाल ही में ईपीएफओ 20 संस्थाओं को डिफॉल्टर घोषित कर 1 करोड़ 17 लाख रुपये की वसूली करने में सफल रही।
चलाया जा रहा है विशेष रिकवरी अभियान
ईपीएफओ ने पीएफ जमा न करने वाली कंपनियों के खिलाफ विशेष रिकवरी अभियान चलाया है, जिसके तहत नियोक्ताओं की गिरफ्तारी, कंपनी और मालिकों की चल-अचल संपत्तियों को जब्त और संस्थानों व नियोक्ताओं के बैंक खातों को फ्रीज करके पीएफ की रिकवरी सुनिश्चित की जा रही है। इसके तहत अबतक 1 करोड़ से ज्यादा की वसूली की जा चुकी है।
शहर की टॉप 10 डिफॉल्टर कंपनियां
फ्रेंड्स ऑटो 42 लाख, चौधरी इंटरप्राइज 34 लाख, पैंथर सिक्योरिटी 32 लाख, रतन एचआर नेटवर्क 23 लाख, श्री श्याम इंटरप्राइज 21 लाख, ब्रिज लक्ष्मी पेपर 20 लाख, ग्लोबल इंटर प्राइज 19 लाख, सनशाइन पावर हाउस 14 लाख, केडीआर फोर्जिंग 13 लाख और सर्वाेम बिल्डर 7 लाख रुपये की राशि बकाया है। संगठन ने इन कंपनियों को कई बार नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन हर बार कंपनियों ने नोटिस की अनदेखी की।
विभागीय जांच में 29 कंपनियों के खिलाफ कर्मचारियों का पैसा न जमा करने पर अरेस्ट वारंट जारी कर कर दिया गया है। पहले भी इस मामले में 50 कंपनियों पर कार्रवाई की गई है। अबतक 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की वसूली संगठन ने कर ली है। सभी कंपनियों के वसूली कर कर्मचारियों के खाते में पैसे डाले जाएगे।
- कृष्ण कुमार, सहायक आयुक्त, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन