प्रशासन की तरफ से विशेष वेटरनरी कैंप, निःशुल्क दवाएं और टीकाकरण जारी
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। बाढ़ का असर केवल लोगों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पशुधन भी इसकी चपेट में आया है। जिले के अति संवेदनशील गांवों में पशुओं की सेहत पर अधिक प्रभाव पड़ रहा है। पशुओं में कई तरह की बीमारियां सामने आ रही हैं। वहीं, प्रशासन की तरफ से पशुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिला प्रशासन के सहयोग से पशुपालन विभाग ने गांव-स्तर पर वेटरनरी कैंप स्थापित किए हैं, जहां मवेशियों की स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और दवाइयों का निःशुल्क वितरण किया जा रहा है।
पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि टीमें सुबह से शाम तक फील्ड में तैनात हैं। हमारा प्रयास है कि किसी भी पशु को संक्रमण न फैले और उनके मालिकों को चारा व दवा की कमी न झेलनी पड़े। प्रभावित क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार पशु आहार भी पहुंचाया जा रहा है
अति संवेदनशील गांवों में विशेष निगरानी
बसंतपुर, किडावली, लालपुर, महावतपुर, राजपुर कलां, तिलोरी खादर, अमीपुर, चिरसी, मंझावली, चंदपुर, मोठुका, अरुआ, छांयसा और मोहना जैसे गांवों में पशुओं की नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही है। इन गांवों को अति संवेदनशील घोषित किया गया है और यहां पशुओं में फीवर, अपच व त्वचा रोग जैसी समस्याओं से बचाव के लिए विशेष दवाएं दी जा रही हैं।
कई लोगों के लिए आजीविका का आधार हैं पालतू पशु
ग्रामीणों ने प्रशासनिक व्यवस्था की सराहना की है। मंझावली गांव के एक पशुपालक ने बताया हमारे लिए पशु ही आजीविका का आधार हैं। बाढ़ में सबसे बड़ी चिंता इन्हीं की होती है। सरकार की ओर से जो टीमें आई हैं उनसे काफी राहत मिल रही है।
प्रशासन के प्रयास से बची है कई पशुओं की जिंदगी
प्रशासन की तरफ से लगाए गए इन कैंपों के माध्यम से न केवल पशुओं की जान बचाई जा रही है, बल्कि ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति को भी सुरक्षित किया जा रहा है। यदि समय रहते यह कदम न उठाए जाते तो बड़ी संख्या में पशुधन बीमार पड़ सकते थे, जिससे ग्रामीणों को भारी नुकसान उठाना पड़ता।