फरीदाबाद। चिकित्सा क्षेत्र में अब तक लक्षणों के आधार पर इलाज होता है, लेकिन शोध के सहारे अमृता अस्पताल बीमारी के मूल कारण का इलाज करने की तैयारी में है। इससे इलाज की परिभाषा ही बदल जाएगी। अस्पताल प्रबंधन सेल बायोलॉजी पर फोकस कर व्यक्ति विशेष की बीमारी अनुसार इलाज सुनिश्चित करने की ओर ध्यान लगा रहा है। इसके लिए 14 मंजिला अस्पताल में सात मंजिला ब्लॉक को रिसर्च के लिए खास रूप से तैयार किया गया है। इसे विशेषज्ञ पर्सनलाइज्ड मेडिसिन के रूप में देख रहे हैं।
सेल बायोलॉजी और मॉलिक्युलर बायोलॉजी स्तर पर शोध कर चिकित्सा क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी है। दिल्ली-एनसीआर में यह सेवाएं अमृता अस्पताल की बदौलत मिलेंगी। शोध को बढ़ावा देने के लिए ज्यादा लोगों को इलाज भी मिलेगा। इससे नए मर्ज के बारे में पता चलेगा और बीमारी के मूल कारण जानने का प्रयास किया जाएगा। सेंटर फोर आर्ट रोबोटिक सर्जरी भी इसमें मददगार होगी। कुल 84 विशेषज्ञ सेवाएं अस्पताल में मिलेंगी। इससे मॉडर्न मेडिसिन की तर्ज पर ग्लोबल स्टैंडर्ड की चिकित्सा से मुकाबला करने में मदद मिलेगी।
40 वर्ष पहले शोध का महत्व समझ गई थीं अम्मा
अम्मा ने अस्पताल के लोकार्पण के समय जनता से शोध के महत्व की आपबीती साझा की। उन्होंने कहा कि 40 वर्ष पहले केरल के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में वह अपने छोटे भाई के साथ इलाज के लिए गईं। वहां एक महिला के पति की दिल की बीमारी से मौत हो गई। उस समय उन्हें पता चला कि संसाधनों व तकनीक के अभाव में मौत हुई। तब उन्हें लगा कि संसाधनों व शोध से कई लोगों को जिंदगी लौटाई जा सकती है। उस समय ही ठान लिया कि देश को चिकित्सा में अच्छे रिसर्च की दरकार है। इसे अपने संभव प्रयास से वह पूरा करेंगी।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों को भी मिलेगा सहयोग
फंड और कई कारणों से सरकारी मेडिकल कॉलेज रिसर्च में पिछड़ जाते हैं। सरकारी कॉलेजों में आईसीएमआर व अन्य मदों के फंड रिसर्च का स्कोप सुनिश्चित करते हैं। इसके साथ ही रिसर्च के लिए जरूरी संसाधनों का भी अभाव सरकारी प्रोफेसरों को खलता है। अम्मा अस्पताल में साइंटिस्ट की भर्ती कर रिसर्च ब्लॉक बनाकर फंड अलॉट कर दिए गए हैं। इससे रिसर्च कई गुना तेजी से हो सकेगी। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के रजिस्ट्रार एके पांडेय बताते हैं कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में साइंटिस्ट की कोई भर्ती नहीं होती। रिसर्च के लिए प्रपोजल बनाकर साइंटिस्ट को पार्ट टाइम लगाया जाता है जबकि अमृता अस्पताल प्रबंधन फुल टाइम रिसर्च के लिए प्रतिबद्धता दिखा रहा है। इससे ज्ञान का आदान-प्रदान होगा। इससे सरकारी मेडिकल कॉलेजों को लाभ मिलेगा।
चिकित्सा सेवा, शिक्षा और शोध का त्रिकोणीय विकास होगा
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के रजिस्ट्रार डॉ. अनिल कुमार पांडेय बताते हैं कि जिले में चिकित्सा सेवा, शिक्षा और शोध का त्रिकोणीय विकास होगा। जिले में पहले से ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में कई विषयों पर शोध हो रहे हैं। इधर, अमृता अस्पताल भी शोध पर जोर दे रहा है। इसे वैश्विक स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। सीएमई का आदान-प्रदान होने पर सभी मेडिकल कॉलेजों को लाभ मिलेगा। साथ ही जन औषधि केंद्रों की स्थापना का स्कोप बढ़ेगा।