गणेश चतुर्थी उत्सव समय के साथ बदल रहा अपना स्वरूप, छोटी प्रतिमाओं का बढ़ा चलन
हेमलता
फरीदाबाद। गणेश चतुर्थी उत्सव समय के साथ अपना स्वरूप बदल रहा है। पांच-दस साल पहले शहर में गणेश उत्सव का मतलब बड़े पंडाल, विशाल प्रतिमा, सजावट और सामूहिक आयोजन से जुड़ा होता था। अब तस्वीर कुछ बदल गई है। सार्वजनिक पंडालों के साथ-साथ घरों, अपार्टमेंट और सोसाइटियों में भी लोग गणपति बप्पा की छोटी प्रतिमा स्थापित कर उत्सव मना रहे हैं। धार्मिक आस्था के साथ सुविधा, परिवार के साथ पूजा करने की इच्छा और पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता भी इस बदलाव की बड़ी वजह मानी जा रही है।
पहले गणेश चतुर्थी के दौरान अलग-अलग मोहल्लों में बड़े पंडाल लगाए जाते थे। कई दिनों तक भजन-कीर्तन, आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम चलते थे। बड़ी संख्या में लोग पंडालों में पहुंचकर दर्शन करते थे। इसके लिए आयोजन समितियां कई सप्ताह पहले से तैयारियों में जुट जाती थीं। अब भी शहर में सार्वजनिक आयोजन हो रहे हैं, लेकिन इनके साथ घरों में गणपति स्थापना का चलन तेजी से दिखाई दे रहा है।
परिवार के साथ पूजा करने की बढ़ी इच्छा
शहरी जीवन में लोगों की दिनचर्या काफी व्यस्त हो गई है। ऐसे में कई परिवार घर पर ही गणपति की स्थापना कर सुबह-शाम पूजा और आरती करना पसंद कर रहे हैं। सोसाइटियों में भी छोटे स्तर पर सामूहिक आयोजन किए जा रहे हैं। इससे बच्चों को भी पूजा और भारतीय परंपराओं से जोड़ने का अवसर मिल रहा है।
छोटी प्रतिमाओं और पर्यावरण पर जोर
पहले बड़ी प्रतिमाओं और भव्य सजावट को ज्यादा महत्व दिया जाता था। अब कई परिवार छोटी और मिट्टी से बनी प्रतिमाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ने के साथ प्राकृतिक सामग्री से बनी प्रतिमाओं और साधारण सजावट की मांग भी बढ़ी है।
सोशल मीडिया ने भी बदला अंदाज
गणेश उत्सव के बदलते स्वरूप में सोशल मीडिया की भी भूमिका है। लोग घर की सजावट, गणपति की प्रतिमा और आरती की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हैं। इससे छोटे घरेलू आयोजन भी उत्सव का हिस्सा बन गए हैं। पहले जहां पंडाल ही आकर्षण का केंद्र होते थे, वहीं अब घरों की गणपति सजावट भी लोगों का ध्यान खींचती है।
महिलाओं से बात
छोटे आयोजन में पूरा परिवार शामिल हो जाता है। पति-पत्नी अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर बच्चों के साथ पूजा करते हैं।- रिचा
इस दौरान बच्चों को गणेश चतुर्थी, पूजा की परंपराओं और महाराष्ट्र की संस्कृति के बारे में भी जानकारी दी जाती है। -श्रीकान्त चास्कर
अब कम दिनों में भी परिवार मिलकर पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ बप्पा का स्वागत और विदाई कर रहा है।- शिल्पा चास्कर
पहले विसर्जन के दौरान पूरी बारात निकलती थी, अब परिवार के 4 लोग ही गाड़ी में बैठकर गणेश को विसर्जित करके आते हैं। - शिवानी