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Faridabad News: मिट्टी के दीयों के साथ-साथ गोबर के दीयों की भी बढ़ी डिमांड

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संवाद न्यूज एजेंसी
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फरीदाबाद। दीपावली पर मिट्टी के दीयों को जलाने की परंपरा रही है। इस बार लोग मिट्टी के दीयों के साथ-साथ गोबर के दीये भी खरीदना बेहद पसंद कर रहे हैं। मिट्टी के दीयाें की भांति यह दीये भी मार्केट में आसानी से उपलब्ध हैं। शहर की गोशालाओं में इन दीयों को बनाए जाने का काम तेजी से किया जा रहा है। दूसरी ओर कई संस्थाओं की ओर से भारी संख्या में इन दीयों के आर्डर भी बुक किए जा रहे हैं।
दिवाली पर लोग मिट्टी के स्थान पर गोबर के दीयों से घर आंगन रोशन करने का मन बना रहे हैं। इसके लिए सूरजकुंड स्थित गोपाल गोशाला में गोबर के दीए बनाए जाने का काम तेजी से किया जा रहा है। महिलाओं द्वारा बड़े ही खूबसूरत ढंग से इन दीयों को बनाया जा रहा है। गोशाला समिति की ओर से कुछ वर्ष पहले गोबर के दीयों को बनाने की मुहिम शुरू की गई थी। इस मुहिम के जरिए महिलाओं को स्वावलंबी बनाए जाने के साथ-साथ लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। इन दीयों का निर्माण डाई की सहायता के केवल गाय के गोबर से किया जा रहा है। लोग सीधे तौर पर भी इन दीयों को गौशाला से खरीदने आ रहे हैं। साथ ही शहर की संस्थाएं की ओर से भी इन दीयों के ऑर्डर बुक किए जा रहे हैं। 20 दीये का पैक 40 रुपये में उपलब्ध हैं। हालांकि महंगा पड़ने की वजह से इस बार संस्था की ओर से इन दीयों की रंगाई नहीं की जा रही।
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समिति के सचिव सुभाष का कहना है कि ऐसी मान्यता है कि त्योहारों में मिट्टी के दीया के साथ गोबर के दीया जलाने से घर में सुख-समृद्धि व शांति आती है। साथ ही गाय के गोबर के दीया पर्यावरण संरक्षण में सहायक माने जाते हैं। गोबर के दीया बाती के जलने के साथ ही स्वयं भी जलकर खाक हो जाते हैं।
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