संवाद न्यूज एजेंसी
तिगांव। तिगांव सरकारी कॉलेज से लेकर मंझावली मोड़ तिगांव तक करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जाने वाली पक्की सीमेंटेड सड़क को लेकर इन दिनों विवाद खड़ा हो गया है। सड़क निर्माण से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि सड़क बनते ही करीब 6 घंटे के भीतर टूटनी शुरू हो गई और जगह-जगह से बिखर गई।
वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई और सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि पहले से बनी पक्की आईएमसी सड़क के ऊपर तारकोल (डामर) की परत डाली जा रही थी, जिसे लोग अंतिम सड़क मान बैठे।लोक निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता सरदार सिंह ने बताया कि वीडियो में दिखाई दे रही तारकोल वाली सड़क अंतिम सड़क नहीं है।उन्होंने कहा, यह कार्य ड्राई लीन कंक्रीट का है, जिसे आम भाषा में सड़क की आधार परत कहा जा सकता है। इसी के ऊपर आगे चलकर आईएमसी की पक्की सीमेंटेड सड़क बनाई जाएगी।
वर्जन
कुछ लोग यह समझ रहे हैं कि तारकोल की सड़क बनाकर उसे ऐसे ही छोड़ दिया जाएगा, जबकि यह पूरी तरह गलत है। यह एक मानक तकनीकी प्रक्रिया है, जिससे सड़क की मजबूती और टिकाऊपन बढ़ता है। विभाग के अनुसार, सड़क निर्माण का कार्य तय मानकों के अनुसार किया जा रहा है और अंतिम चरण में लोगों को मजबूत और स्थायी आईएमसी सड़क मिलेगी। विभाग ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से अधूरी जानकारी के साथ भ्रम फैला रहा है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। -सरदार सिंह, कनिष्ठ अभियंता, लोक निर्माण विभाग