- ई-न्यायालय की मदद से 2020 से 2021 तक 24 हजार से ज्यादा मुकदमों में सुनाई गई सजा
- पिछले दस वर्षों में 1 लाख 70 हजार मामलों का हुआ निपटारा
धीरज गिरी
फरीदाबाद। जिला अदालत फरीदाबाद में लंबित मामलों में हो रही बढ़ोत्तरी और लोगों की परेशानियों को देखते हुए 2019 में वर्चुअल कोर्ट यानी ई-न्यायालय की शुरुआत की गई। पिछले पांच वर्षों में मामलों की सुनवाई ने पहले के मुकाबले जिस तरह से रफ्तार पकड़ी उसका श्रेय ई-न्यायालय को जाता है। वर्ष 2019 से अबतक फरीदाबाद न्यायालय में राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) के अनुसार 86,420 मामलों का निपटारा किया जा चुका है। इस बीच 2020 से 2021 तक कोरोना काल होने के बावजूद इन दो वर्षों में 24 हजार से ज्यादा मुकदमों में लोगों को न्याय मिला, जिसमें वर्चुअल कोर्ट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वर्चुअल कोर्ट स्थापना के बाद पिछले पांच वर्षों से अबतक जिला अदालत फरीदाबाद ने 41,342 आपराधिक मामलों में दोषी पाए गए आरोपियों को सजा सुनाई, वहीं, 45,078 दीवानी मामलों लोगों को न्याय दिलाया। इनमें 5 से 10 वर्ष के बीच 2315 और 10 वर्ष से ऊपर के 63 मामले शामिल हैं। पिछले 10 वर्षों का एनजेडीजी का आंकड़ा कहता है कि न्यायालय 17,0861 मामले का निपटारा करने में सफल रही है, जिसके अंतर्गत फरीदाबाद न्यायालय के ऊपर से 71,695 आपराधिक और 99,166 दीवानी मामलों का बोझ कम हुआ है। पूरे हरियाणा की बात करें, तो इन 10 वर्षों में करीब 54 लाख मामलों में कमी आई है।
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ई-न्यायालय से मिलने वाले लाभ
लंबित मामलों में हो रही बढ़ोत्तरी को कम करने, आर्थिक दृष्टि से नागरिकों की फिजूल खर्ची को बचाने और न्यायालय में बिना उपस्थित हुए सुनवाई की प्रक्रिया में वर्चुअल कोर्ट काफी अहम भूमिका निभा रहा है। विदेश में बैठे लोग इस सुविधा से घर बैठे मामले की सुनवाई से जुड़ सकते हैं।
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ई-न्यायालय की प्रक्रिया
वर्चुअल कोर्ट के लिए न्यायाधीश से इजाजत लेनी पड़ती। मंजूरी मिलने के बाद दोनों पक्षों के लोग अपनी-अपनी बात डिजिटल तकनीक के माध्यम से रख सकते हैं। फरीदाबाद की अदालत में ई-न्यायालय की हर सुविधा उपलब्ध की गई है।
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वर्चुअल कोर्ट के आने से सुनवाई में हुई तेजी
वर्चुअल कोर्ट के आने से सुनवाई में तेजी आई है। कोरोना काल में ई-न्यायालय के माध्यम से बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा किया गया। यह लोगों के नजरिए से भी सुविधाजनक है, ताकि न्याय के दौरान फिजूल के खर्चों से बचा जा सके।
- शिवदत्त वशिष्ठ, वरिष्ठ अधिवक्ता, बार काउंसिल पंजाब एवं हरियाणा के पूर्व मनोनीत सदस्य