एफएमडीए ने गहरे और दलदली हिस्सों में विशेष मशीन लगाने का लिया निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। मानसून के बीच शहर की जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एसी नगर नाले की सफाई अब लॉन्ग-रीच (बूम) मशीन से कराई जाएगी। बीते दिनों सफाई के दौरान जेसीबी और ट्रैक्टर के नाले में धंस जाने के बाद सुरक्षा कारणों से अभियान रोक दिया गया था। अब फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) ने गहरे और दलदली हिस्सों में विशेष मशीन लगाने का निर्णय लिया है। अधिकारियों के अनुसार एक या दो दिन में सफाई दोबारा शुरू होने की संभावना है ताकि बारिश के दौरान एनआईटी और बड़खल क्षेत्र में जल निकासी प्रभावित न हो।
एफएमडीए के अधिकारियों के अनुसार, नीलम चौक के पास मेनवली और बांकी क्षेत्र में नाले की गहराई अधिक है। वर्षों से जमा गाद, प्लास्टिक और ठोस कचरे के कारण कई स्थान दलदली हो चुके हैं। ऐसे हिस्सों में सामान्य जेसीबी और ट्रैक्टर के उतरने से मशीनों के धंसने का खतरा बना रहता है। हाल की घटना के बाद विभाग ने कार्य की समीक्षा की और तय किया कि आगे की सफाई लंबी पहुंच वाली मशीन से कराई जाएगी। एफएमडीए के कार्यकारी अभियंता ओमदत्त के अनुसार उद्देश्य यह है कि सफाई कार्य सुरक्षित तरीके से पूरा हो और बारिश के दौरान पानी की निकासी बाधित न हो।
शहर की जल निकासी में अहम भूमिका निभाता है एसी नगर नाला
एसी नगर नाला एनआईटी और बड़खल क्षेत्र के वर्षा जल को आगे गौंछी ड्रेन तक पहुंचाने वाली प्रमुख जल निकासी प्रणाली का हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस नाले में गाद और कचरा जमा रहता है तो तेज बारिश के दौरान पानी की निकासी की क्षमता तेजी से घट जाती है। इसका असर आसपास की सड़कों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में जलभराव के रूप में सामने आता है। एफएमडीए ने इस वर्ष मानसून से पहले प्रमुख नालों की सफाई का अभियान शुरू किया था। विभाग के अनुसार एनआईटी और बड़खल क्षेत्र के लगभग सभी प्रमुख नालों की सफाई काफी हद तक पूरी की जा चुकी है। एसी नगर नाले पर भी अब दोबारा से काम शुरू किया जा रहा है।
पहले अतिक्रमण भी बना था बड़ी चुनौती
सफाई अभियान की शुरुआत भी आसान नहीं रही। जून में जब एफएमडीए की टीम मशीनों के साथ मौके पर पहुंची थी तो नाले तक पहुंचने वाले रास्ते में बने अतिक्रमण हटाने पड़े। स्थानीय लोगों के विरोध के कारण कुछ समय के लिए काम रोकना पड़ा और पुलिस की मौजूदगी में कार्रवाई दोबारा शुरू हुई। अधिकारियों ने तब स्पष्ट किया था कि कार्रवाई का उद्देश्य केवल नाले तक मशीनों की पहुंच सुनिश्चित करना और सफाई कराना है। अधिकारियों का कहना है कि नाले के दोनों किनारों पर कई स्थानों पर अतिक्रमण और संकरी पहुंच सफाई कार्य को धीमा कर देती है। ऐसे में बड़ी मशीन का उपयोग अपेक्षाकृत अधिक प्रभावी माना जा रहा है।
आगे की चुनौती केवल सफाई नहीं, रखरखाव भी
स्थानीय लोगों का कहना है कि नाले में घरेलू कचरा और प्लास्टिक फेंकने की समस्या अब भी बनी हुई है। कई स्थानों पर सीवर और वर्षा जल निकासी तंत्र एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं जिससे बारिश के समय स्थिति और जटिल हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि नालों की नियमित डी-सिल्टिंग, अतिक्रमण मुक्त कॉरिडोर, ठोस कचरा प्रबंधन और वास्तविक समय पर निगरानी जैसी व्यवस्थाएं साथ-साथ लागू हों तभी लंबे समय तक जलभराव की समस्या कम हो सकेगी।