राख के ढेर पर उगाया जाएगा जंगल, अरावली में वन विभाग करेगा वैज्ञानिक प्रयोग। राख के ढेर का चल रह
150 एकड़ फ्लाई ऐश क्षेत्र में पहले चरण में 50 एकड़ पर लगेंगे पांच हजार पौधे, सफल होने पर बढ़ेगा दायरा
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अरावली की पहाड़ियों में वर्षों से प्रदूषण का कारण बनी कोयले की राख के विशाल ढेर को अब हरियाली में बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। वन विभाग 150 एकड़ में फैले फ्लाई ऐश डंपिंग ग्राउंड पर वैज्ञानिक तरीके से पौधरोपण का प्रयोग करेगा। योजना के तहत पहले चरण में 50 एकड़ क्षेत्र में करीब पांच हजार पौधे लगाए जाएंगे। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो इसे पूरे क्षेत्र में लागू किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य अरावली के पर्यावरणीय संतुलन को बहाल करना और प्रदूषण कम करना है।
यह 150 एकड़ भूमि हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन (एचपीजीसीएल) की है। जब यहां थर्मल पावर प्लांट संचालित था, तब कोयला जलने के बाद निकलने वाली फ्लाई ऐश को पाइपलाइन के माध्यम से इस क्षेत्र में डंप किया जाता था। वर्षों में यहां राख का विशाल ढेर बन गया, जिससे आसपास के गांवों और रिहायशी क्षेत्रों में धूल उड़ने, सांस संबंधी बीमारियों, एलर्जी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ने लगीं। यह मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में भी विचाराधीन है।
वन विभाग का कहना है कि फ्लाई ऐश में सामान्य मिट्टी जैसे पोषक तत्व नहीं होते, इसलिए पूरे क्षेत्र में एक साथ पौधरोपण नहीं किया जाएगा। पहले वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर ऐसी पौध प्रजातियों का चयन किया जाएगा, जो राख की सतह पर भी विकसित हो सकें।
पहले चरण में करीब 50 एकड़ क्षेत्र में पांच हजार पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन से सिंचाई व्यवस्था के तहत ट्यूबवेल लगाने को कहा गया है। प्रयोग के परिणामों के आधार पर आगे पूरे क्षेत्र में पौधरोपण की योजना बनाई जाएगी।-अफजल खान, रेंज वन अधिकारी