अदालत ने व्हाट्सएप चैट को आपसी प्रेम संबंध का संकेत माना, युवती ने मुख्य बयान में भी तथ्य छिपाया
सचिन कुमार
फरीदाबाद। इंस्टाग्राम से शुरू हुई दोस्ती, ओयो होटल में मुलाकात और व्हाट्सएप पर स्वीट वाइफ-स्वीट हार्ट हसबैंड जैसे संबोधन … इन्हीं तथ्यों के इर्द-गिर्द घूमते दुष्कर्म के एक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी युवक को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुरुषोत्तम कुमार की अदालत ने नौ फरवरी को सुनाए गए फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में विफल रहा है। मामला 15 मई 2023 को महिला थाना एनआईटी में दर्ज एफआईआर से जुड़ा था, जिसमें आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म का आरोप लगाया गया था।
अभियोजन के अनुसार युवती की पहचान आरोपी से करीब डेढ़ वर्ष पहले इंस्टाग्राम के माध्यम से हुई थी। बातचीत बढ़ी तो दोनों ने मोबाइल नंबर साझा किए और आधार कार्ड तक एक-दूसरे को भेजे। युवती ने आरोप लगाया कि मार्च 2023 में आरोपी उसके कॉलेज के बाहर मिला और निजी बातचीत का हवाला देकर उसे एनआईटी-5 स्थित ओयो होटल ले गया। वहां उसने पुराने फोटो वायरल करने की धमकी देकर शारीरिक संबंध बनाए। बाद में दोबारा होटल चलने का दबाव बनाया और परिवार को फोटो भेजने की धमकी दी। घटना 13 या 14 मार्च 2023 की बताई गई, जबकि एफआईआर दो महीने बाद 15 मई को दर्ज कराई गई।
सुनवाई के दौरान होटल प्रबंधन द्वारा पेश रजिस्टर रिकॉर्ड में सामने आया कि दोनों नौ जनवरी 2023 और 13 मार्च 2023 को होटल आए थे और तीन से चार घंटे रुके थे। 14 मार्च की कोई एंट्री दर्ज नहीं थी। रजिस्टर में दोनों के हस्ताक्षर और पहचान पत्र की प्रतियां मौजूद थीं। जिरह में युवती ने स्वीकार किया कि वह जनवरी में भी आरोपी के साथ होटल गई थी, हालांकि उसने कहा कि उस दिन शारीरिक संबंध नहीं बने थे। अदालत ने पाया कि यह तथ्य उसने मुख्य बयान में नहीं बताया था।
मेडिकल जांच में युवती के शरीर पर किसी प्रकार की चोट नहीं मिली। डॉक्टर ने राय दी कि शारीरिक संबंध की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन जबरदस्ती के कोई संकेत नहीं पाए गए। डिजिटल साक्ष्य के रूप में मोबाइल से निकाले गए फोटो और वीडियो अदालत में चलाए गए, जिनमें दोनों सामान्य रूप से साथ खड़े या बैठे दिखे। किसी भी फोटो या वीडियो को अश्लील या आपत्तिजनक नहीं पाया गया। युवती ने स्वीकार किया कि तस्वीरें उसकी सहमति से ली गई थीं और आरोपी ने उन्हें किसी प्लेटफॉर्म पर साझा नहीं किया।
बचाव पक्ष ने व्हाट्सएप चैट भी पेश की, जिसे युवती ने नकारा नहीं। चैट में दोनों एक-दूसरे को आई लव यू, स्वीट वाइफ, स्वीट हार्ट हसबैंड और पति-पत्नी कहकर संबोधित कर रहे थे। अदालत ने इसे आपसी प्रेम संबंध का संकेत माना। यह भी सामने आया कि युवती ने आरोपी का नंबर अपने मोबाइल में किसी अन्य नाम से सेव किया था। कॉल डिटेल रिकॉर्ड या धमकी के स्वतंत्र साक्ष्य भी पेश नहीं किए गए।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दुष्कर्म के मामलों में केवल पीड़िता की गवाही के आधार पर भी दोष सिद्धि हो सकती है, बशर्ते वह सुसंगत और भरोसेमंद हो। लेकिन इस मामले में तारीख को लेकर विरोधाभास, पहले की होटल विजिट छिपाना, मेडिकल साक्ष्य का अभाव और दो महीने की देरी से एफआईआर दर्ज होना अभियोजन की कहानी पर संदेह पैदा करता है। अदालत ने माना कि यदि संबंध पहले से चल रहा था और दोनों वयस्क थे, तो सहमति की संभावना से पूरी तरह इंकार नहीं किया जा सकता। इन सभी तथ्यों के मूल्यांकन के बाद अदालत ने कहा कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा है। परिणामस्वरूप आरोपी को दोषमुक्त करार दिया गया।