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कांत एंक्लेव: प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री से लगाएंगे आशियाना बचाने की गुहार

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कांत एंक्लेव पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट (पीएलपीए) के दायरे में नहीं आता। हरियाणा सरकार के प्रधान सचिव वन विभाग ने खुद ही न्यायालय में यह कुबूल किया था कि कांत एंक्लेव को नोटिफिकेशन में गलती से शामिल कर लिया गया। यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट में ठीक से पैरवी करती और कांत एंक्लेव को डिनोटिफाई कर देती तो यह फैसला नहीं आता। यह दावा कांत एंक्लेव ऑर्गनाइजेशन ऑफ रेजिडेंट्स के प्रधान ब्रिगेडियर मोहिंदर बीर आनंद वीएसएम ने पत्रकार वार्ता के दौरान किया। उन्होंने कहा कि कांत एंक्लेव में जीवनभर की कमाई लगाकर आशियाना बनाने वालों को उजड़ने से बचाने के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई जाएगी।

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सेक्टर-21 स्थित जिमखाना क्लब में पत्रकारों से रूबरू हुए कांत एंक्लेववासियों का पक्ष रखते हुए ब्रिगेडियर एमबी आनंद ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से इस केस में ठीक से पैरवी नहीं की गई। केंद्र सरकार एनसीआर प्लानिंग बोर्ड एक्ट के तहत 2021 और 2031 का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। मास्टर प्लान में कांत एंक्लेव को शामिल किया गया है। यदि यह वन विभाग की जमीन होती तो कांत एंक्लेव को मास्टर प्लान में शामिल नहीं किया जाता। रेजिडेंट संजय बासु ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव ने लिखित बयान दिया है कि कांत एंक्लेव को पीएलपीए में गलती से शामिल किया गया है। संजय कहते हैं कि वन विभाग इस नोटिफिकेशन को गलत मानता है। यही कारण है कि वन विभाग की ओर से कांत एंक्लेववासियों को एक भी नोटिस जारी नहीं किया गया।

ब्रिगेडियर एमबी आनंद कहते हैं कि पीएलपीए को सूरजकुंड से लेकर अनखीर चौक तक पूरे इलाके में लगी है। इस इलाके में हुडा के सेक्टर, यूनिवर्सिटी, सेक्टर-21 जिमखाना क्लब सहित कई सरकारी इमारतें आती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हुडा के खिलाफ भी निर्णय दिया है तो फिर सिर्फ कांत एंक्लेव को ही उजाड़ने का आदेश क्यों। आदेश सभी पर बराबरी से लागू होना चाहिए। रेजिडेंट रबिनदास गुप्ता कहते हं कि यह देश के न्यायिक इतिहास में पहला निर्णय है जिसमें सरकारी नियम, कानून के तहत बनाए गए मकानों को उजाड़ा जा रहा है जबकि सरकार अवैध कॉलोनियों को रेगुलराइज कर रही है।
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सरकार से लगाएंगे न्याय दिलाने की गुहार
ब्रिगेडियर एमबी आनंद ने कहा कि रेजिडेंट्स की ओर से सरकार से न्याय दिलाने की गुहार लगाई जाएगी। प्रधान सचिव के सर्वोच्च न्यायालय में दर्ज कराए गए बयान कि कांत एंक्लेव को गलती से पीएलपीए में शामिल किया गया है, का हवाला देते हुए इस इलाके को डिनोटिफाई कराने की मांग की जाएगी। रेजिडेंट्स ने सरकार, डीटीपी से जांच पड़ताल करने और मास्टर प्लान 2021 में इसके शामिल होने की तसल्ली करके ही कांत एंक्लेव में प्लॉट खरीदे हैं। संजय बासू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पचास लाख रुपये तक मुआवजा देने का आदेश दिया है। अधिकतर रेजिडेंट्स ने अपनी जीवन भर की कमाई लगाने के साथ बैंक से लोन लेकर मकान बनाए हैं, मकान गिरते ही बैंक रिकवरी शुरू कर देगी। पहले तो मुआवजा मिलने की उम्मीद नहीं है अगर मिल भी गया तो बैंक का कर्ज उतारने में चुक जाएगा, रेजिडेंट्स सड़क पर आ जाएंगे।

हम अपनी प्रॉपर्टी नहीं छोड़ेंगे, हम घर में ही रहेंगे, सरकार को अगर बुलडोजर चलाना है तो हमारे ऊपर से गुजरना होगा, हम उसी में मरेंगे।- परमजीत वाधवा, रेजिडेंट
मैं कांत एंक्लेव का आर्किटेक्ट हूं, यहां जंगल तो दूर हरियाली नहीं थी, पहाड़ी इलाके में चालीस मीटर गड्ढों को रेती से भरकर पहला रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम हमने यहां बनाया। पूरे इलाके में पहाड़ियों को खोद कर मिट्टी भर कर पौधे लगाए, आज जो हरियाली यहां दिख रही है वह भी 1992 के बाद ही हुई है।- रबिनदास गुप्ता, रेजिडेंट

सुप्रीम कोर्ट ने हमारे घर तोड़ने का आदेश दे दिया, मैं विधवा हूं, पति ने पूरे जीवन की कमाई लगाकर घर बनाया था। अब घर छोड़ना पड़ा तो मेरे जैसी बेसहारा महिलाएं कहां जाएंगी, कोर्ट को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।- कमलेश देवी, रेजिडेंट

सुप्रीम कोर्ट भी हमें दोषी नहीं मानती इसीलिए तो फैसले में मुआवजा दिलाने का प्रावधान किया गया है। यदि हम दोषी नहीं तो हमारे आशियाने क्यों उजाड़े जाएं, जिन अधिकारियों की गलती है उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।- कर्नल बीबी शरण, रेजिडेंट

हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव धर्मवीर ने 15 मार्च 2009 को शपथ पत्र देकर स्वीकार किया था कि कांत एंक्लेव की इमारतें अवैध नहीं कही जा सकतीं। हरियाणा सरकार खुद कांत एंक्लव को पीएलपीए से बाहर रखना चाहती थी। इन्हीं आधार पर सरकार और सुप्रीम कोर्ट से न्याय की गुहार लगाई जाएगी।

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