एनजीटी ने छह डाइंग यूनिट बंद करने फैसला सुनाया
- यूनिटों पर पांच पांच लाख रुपये जुर्माना भी लगाया
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। राष्ट्रीय हरित अभिकरण (एनजीटी) न्यायालय ने औद्योगिक नगरी में सेक्टर 58 में चल रहीं छह डाइंग और प्लेटिंग यूनिटों पर पांच-पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए उन्हें तुरंत बंद किए जाने का आदेश दिया है। आरटीआई कार्यकर्ता ने इन यूनिटों से निकलने वाले जहरीले रसायन से इलाके में जल प्रदूषण फैलने की शिकायत करते हुए एनजीटी में याचिका दर्ज की थी।
वरुण श्योकंद के मुताबिक उन्होंने जून 2016 में सेक्टर 58 का सर्वे किया था। उन्होंने इसकी शिकायत निदेशक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पंचकूला से की थी। कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने एनजीटी में याचिका डाल कर इलाके में हो रहे जल प्रदूषण को रुकवाने की मांग की थी। मामले की सुनवाई और बहस पूरी होने पर सोमवार को एनजीटी न्यायालय ने प्रदूषण छह यूनिटों को प्रदूषण फैलाने का दोषी करार दिया और तुरंत ही उन्हें बंद कराए जाने के आदेश जारी किए। वादी पक्ष के अधिवक्ता शरीफ अब्बास जैदी ने बताया कि इन इकाईयों से जल प्रदूषित होने की वजह से झाड़सेंतली गांव में कैंसर के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। गांव में 22 लोगों को कैंसर है। ट्रिब्यूनल न्यायालय ने इन यूनिटों पर पांच-पांच लाख रुपये जुर्माना भी किया। वरुण श्योकंद का कहना है कि प्रदूषण फैलाने वाली यूनिटें बंद होने से औद्योगिक नगरी का वातावरण साफ सुथरा हो इसका वह लगातार प्रयास करते रहेंगे।