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ए बहुना इहीं मिथले बिरुहना, जौने सुख बा ससुरारी में, तौन्हें सुख बा कहुं न

Tue, 13 Nov 2018 08:23 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
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- फोटो : PTI
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फरीदाबाद। सूरजकुंड छठ पूजा समिति का पंडाल उभरती गायक मैथिली ठाकुर की आवाज से उस समय गूंजने लगा जब लोकप्रिय लोकगीत जुग जुग जियसु ललनवा, भवनवा के भाग जागल हो और ए बहुना इहीं मिथले बिरुहना, जौने सुख बा ससुरारी में, तौन्हें सुख बा कहुं न, ए बहुना इहीं मिथले बिरुहना आदि गाए गए।

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इस दौरान पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यहां बैठा हर आदमी मंत्रमुग्ध होकर इस बाल कलाकार के मुंह से सुरीले लोकप्रिय लोकगीत सुन रहा था। इसके साथ ही पटना से आए संगीतकार मनीष मिश्रा ने पाज हमर पहचानिया गीत की प्रस्तुति दी।

करीब चार घंटे चले इस कार्यक्रम में लोग मैथिली ठाकुर को सुनने के लिए दिल्ली एनसीआर के कई शहरों से पहुंचे हुए। पूरा पूजा स्थल श्रद्धालुओं की भीड़ से भरा हुआ था। सूरजकुंड पूजा समिति के सदस्य शिशिर सिन्हा ने बताया मैथिली ठाकुर और उनके दो छोटे भाइयों को सुनने को लेकर लोगों में एक अलग बेताबी देखने को मिली।
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संगीतमय कार्यक्रम में मैथिली ठाकुर ने चार चांद लगा दिए। इसके साथ मैथिली ने कई लोकगीत गाकर समां बांधा जिसमें रोज सबरे उपटना मल के, इतर से नाबाहब, एक महीने के भीतर, करिया से गोर बनाए हो, रोज कहत न पानी तन को मौका इक दिहुना।

ए बहुना इहीं मिथले बिरुहना, ए बहुना इहीं मिथले बिरुहना और छठ का पावन गीत वर्तिन के आंगना में किरवा केरे गाज, किरवे केरे तोड़े गईले हे, पर वर्तिन बलकाबा गईले आज छोड़ा- छोड़ा हमरा दाहिन बात आदि खास रहा।

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