‘कृपया वोट मांगकर प्रत्याशी शर्मिंदा न करें’
फरीदाबाद। मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे सेक्टर-22 ईस्ट इंडिया कॉलोनी वासियों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया है। इसके अलावा प्रत्याशियों का भी कॉलोनी में बहिष्कार किया गया। यहां के लोगों द्वारा कॉलोनी में जगह-जगह घर व दुकानों पर बोर्ड लगाए गए हैं, जिन पर लिखा है कृपया किसी भी पार्टी के प्रत्याशी वोट मांगकर शर्मिंदा न करें। लोगों ने चुनावी माहौल में ‘सुनवाई नहीं तो वोट नहीं’ का नारा दिया है।
रेजीडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) के प्रधान किशन कुमार बारी ने बताया कि ईस्ट इंडिया कॉलोनी को वर्ष 1980 में बसाया गया था। इस समय कॉलोनी में 216 मकान हैं। उस समय सरकार ने कॉलोनी में मार्केट, सामुदायिक भवन, बेहतर सीवर सिस्टम और पेयजल सप्लाई का दावा किया था। करीब 40 साल बीत गए, मगर कॉलोनी में मकानों की अब तक रजिस्ट्री नहीं हुई है। कॉलोनी में कोई सामुदायिक भवन नहीं है। पेयजल की बेहतर सुविधाएं नहीं है। ट्यूबवेल और टैंकरों से पानी सप्लाई होता है। गर्मियों में हमेशा पानी की समस्या बनी रहती है। सीवर लाइन हमेशा चोक रहती है। इसके अलावा यहां अनेक समस्या हैं। उन्होंने कहा कि कॉलोनी की समस्याओं के लिए कई बार केंद्रीय राज्य मंत्री, विधायक, पार्षद, निगम अधिकारियों से गुहार लगाई गई। मगर लोगों की कोई सुनवाई नहीं होती है। इसलिए कॉलोनी वासियों ने इस बार निर्णय लिया है कि वह किसी भी पार्टी को वोट नहीं डालेंगे।
निगम ने सामुदायिक भवन का टेंडर किया रद्द
लोगों का आरोप है कि पिछले दिनों निगम ने कॉलोनी में 1.35 करोड़ रुपये की लागत से सामुदायिक भवन बनाने का टेंडर किया था। अब उसे रद्द कर दिया गया है और इस जमीन को पूंजीपति को बेच रहे। ऐसा वह होने नहीं देेंगे।
लोगों से बातचीत
कॉलोनी की समस्या पर कोई सुनवाई नहीं होती है। प्रत्याशी वोट मांगने आ जाते हैं। इसलिए लोकसभा चुनाव में कॉलोनी वासियों ने वोट नहीं डालने का फैसला किया है।
- किशन कुमार बारी, प्रधान-आरडब्ल्यूए
मकान बनाए करीब 40 साल बीत गए अब तक रजिस्ट्री नहीं हुई। रजिस्ट्री करवाने के लिए अधिकारी और नेताओं के चक्कर काटते हैं। कहीं कोई सुनवाई नहीं होती। - राकेश श्रीवास्तव, कॉलोनी निवासी
जब कोई प्रत्याशी हमारे लिए कुछ कर नहीं सकता, तो उसे लोगों से वोट मांगने का भी कोई अधिकार नहीं। इसलिए कृपया वोट मांग कर हमें परेशान न करें। - सुमन सिंह पंवार, कालोनी निवासी
चुनाव जीतने के बाद कोई नेता लोगों का हाल जानने नहीं पहुंचता। लोग मरते है तो मरते रहें की रणनीति पर चलते है। मेरे पूरे परिवार ने फैसला किया कि वोट नहीं करूंगा।
- मनोज पाठक, कॉलोनी निवासी