अहंकार में चूर हो नारद ने खोला मुंह...जीत लिया कामदेव को
फरीदाबाद। फरीदाबाद दशहरा कमेटी के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर कमेटी प्रबंधन रामलीला मंचन और दशहरा पर्व के दौरान 2500 औषधीय पौधे बांट कर लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगा। शहर में कई पंडालों में रामलीला का मंचन शुरू हो गया है। रविवार रात को विजय रामलीला कमेटी में नारद मोह और जागृति रामलीला के मंच पर सीता स्वयंवर का मंचन किया गया।
सेक्टर-31 दशहरा मैदान में आयोजित होने वाले दशहरा पर्व के लिए सोमवार को बैठक हुई। बैठक में कमेटी के प्रधान डा. कौशल बाठला ने बताया कि कमेटी के 25 वर्ष पूरे होने पर इस पर पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों पर गैस के हजारों गुब्बारे लगाए जाएंगे। इसके अलावा पर्दे पर रामानंद सागर कृत रामायण का प्रदर्शन किया जाएगा। 9 अक्तूबर से 18 अक्तूबर से तक शाम को 7 बजे से 11 बजे तक रामायण का प्रदर्शन होगा। इस दौरान मंच से धार्मिक, सामाजिक संस्थाओं व शहर के लोगों को औषधीय पौधे देकर सम्मानित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जाएगा। बैठक में वरिष्ठ उपमहापौर देवेंद्र चौधरी, पार्षद अजय बैंसला, अनिल नागर, संदीप चपराना, मुकेश तौमर, आरएसएस से कैलाश सिंघल, आजे कालिया, कमेटी के महासचिव वीके अग्रवाल सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।
एनआईटी-1 बी ब्लॉक स्थित विजय रामलीला कमेटी के मंच पर रविवार रात को नारद मोह का मंचन किया। रामलीला के पहले दिन नारद मोह प्रसंग का मंचन हुआ। जिसमें घोर तपस्या कर रहे नारद मुनि से विचलित स्वर्ग के राजा इंद्र कामदेव को उनका तप भंग करने भेजते हैं। मगर कामदेव इसमें असफल रहते हैं। इस तरह नारद को मोह हो जाता है कि उन्होंने कामदेव को जीत लिया है। अपने इस अहंकार को वो बारी-बारी से शिव जी, ब्रह्मा जी व विष्णु जी को बताते हैं। सभी देवता उन्हें इसे आगे और किसी को बताने से मना करते हैं, पर मद में चूर नारद जी नहीं मानते। सोमवार को विजय रामलीला कमेटी के मंच पर राम जन्म व ताड़का वध का मंचन किया गया।
इसी तरह एनआईटी-2 स्थित जागृति रामलीला कमेटी के मंच पर सीता स्वयंवर प्रसंग का मंचन किया गया। घर में खेलते हुए सीता माता को भगवान शिव का धनुष उठाए देख राजा जनक हैरान हो जाता हैं और घोषणा करते हैं कि जो भगवान शिव के धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाएगा, वे उसका विवाह सीता से करेंगे। कई देशों के राजकुमार वहां आते हैं और कोशिश करते हैं, मगर धनुष को अपनी जगह से हिला भी नहीं पाते हैं। अंत में भगवान राम धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाते हैं। कलाकारों ने बेहतरीन अभियान कर दर्शकों को मंचन के दौरान पूरी तरह बांधे रखा।