अरावली में होटल का निर्माण सही या गलत, जांचेगी स्टेट विजिलेंस
फरीदाबाद। पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट (पीएलपीए) के तहत संरक्षित घोषित अरावली पहाड़ियों में होटल का निर्माण किया जाना सही है या गलत, इसकी जांच स्टेट विजिलेंस करेगी। इस होटल के अलावा पांच फार्म हाउस को सीएलयू जारी किए जाने की जांच भी स्टेट विजिलेंस ने शुरू कर दी है।
शहर के आरटीआई और सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश गोयल ने मुख्यमंत्री मनोहरलाल और स्टेट विजिलेंस ब्यूरो को पत्र लिख कर अरावली में होटल निर्माण और पांच फार्म हाउस की जांच कराने की मांग की थी। मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत में सुरेश गोयल ने बताया था कि वर्ष 1992 में पूरी अरावली को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया गया था। पीएलपीए की धारा चार और पांच लागू होने के कारण इस इलाके में खनन, निर्माण या किसी भी तरह की गैर प्राकृतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसके आदेश जारी किए हैं। आरोप है कि बावजूद इसके भूमाफिया अरावली की जमीन पर अवैध निर्माण कर रहे हैं। पत्र में उन्होंने सरकार की मिलीभगत से अवैध कब्जे और निर्माण होने का आरोप लगाया। बताया कि सूरजकुंड रोड पर एक बड़ा पांच सितारा होटल बन रहा है। इसके लिए वन विभाग से एनओसी नहीं ली गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2015 में एनओसी जारी की थी जिसे एनजीटी के आदेश के बाद अप्रैल 2018 में वापस ले लिया गया। वन, पर्यावरण आदि विभागों की एनओसी नहीं होने के बावजूद होटल का निर्माण चल रहा है। इसके अलावा सूरजकुंड रोड पर पांच फार्म हाउसों का निर्माण किया गया है, इन फार्म हाउसों को भी गलत तरीके से नगर निगम ने सीएलयू जारी किया। उन्होंने सरकार से निर्माण पर रोक लगवाने और मामले की जांच कराने की मांग की थी। उनकी शिकायत पर स्टेट विजिलेंस को जांच सौंपी गई है। सुरेश गोयल ने बताया कि जांच कराने के आदेश की एक कॉपी उन्हें मिली है। स्टेट विजिलेंस के डीजी ने हरियाणा शहरी स्थानीय निकाय को पत्र लिखकर रिपोर्ट तलब की है।