फरीदाबाद (मूर्ति दलाल)। स्कूलों की मान्यता काफी अहम कार्य है लेकिन वर्ष 2018 के बाद दी गई मान्यता पर सवाल खडे़ हो गए हैं। निदेशालय में पहुंची 28 फाइलों को ऑनलाइन जमा कराने को कहा गया तो धांधली का खुलासा हुआ। मान्यता कमेटी में शामिल सदस्यों के फर्जी हस्ताक्षरों से ये फाइलें तैयार कराई गई थीं। कमेटी में शामिल सदस्यों ने एक के बाद एक अपने फर्जी हस्ताक्षर वाली फाइलें देख आपत्ति दर्ज कराई गई हैं। मामले की शिकायत न सिर्फ जिला स्तर पर, बल्कि निदेशालय तक की जा चुकी है। स्कूल मान्यता जांच कमेटी के हेड ने मामले को गंभीर मानते हुए सोमवार से जांच की बात कही है।
निदेशालय ने स्कूल मान्यता के लिए बनाई थी जिला स्तरीय कमेटी
निदेशालय ने माध्यमिक स्तर पर चल रहे स्कूलों को 9वीं से 12वीं कक्षा पढ़ाने की मान्यता देने के लिए जिला स्तर पर फरवरी वर्ष 2018 में कमेटी का गठन किया था। इसमें जिला शिक्षा अधिकारी बतौर चेयरमैन, खंड शिक्षा अधिकारी सदस्य, संबंधित क्षेत्र के नजदीकी सरकारी स्कूल प्रधानाचार्य को सदस्य बनाया गया। कमेटी स्तर पर मान्यता के लिए आवेदन करने वाले स्कूल की जमीन, कमरों की संख्या, माप, हाइजीन, प्लेजमनी, सुरक्षा मापदंड तय मान्यता की अनुशंसा वाली फाइल निदेशालय भेजनी होती हैं।
28 स्कूलों में ज्यादातर संकरे इलाके में हैं
जांच कमेटी के सदस्यों के फर्जी हस्ताक्षर वाले स्कूल कुछ विशेष इलाकों से संबंधित हैं। यहां संकरी गलियां, छोटे प्लॉट में कई स्कूल संचालित हैं। इनमें से कुछ के नाम फर्जी हस्ताक्षर घोटाले में सामने आए हैं। इसमें डबुआ संबंधी करीब आठ स्कूलों के नाम शामिल हैं। गौंछी स्थित स्कूल, पर्वतीया कॉलोनी व एनआईटी पांच स्थित स्कूलों की मान्यता की फाइल इन दिनों शक के घेरे में हैं।
ऐसे खुली पोल:
शिक्षा विभाग में फर्जी तरीके से स्कूलों को मान्यता दिलाने की पोल ऑनलाइन सिस्टम के कारण खुली। मान्यता हासिल करने के लिए स्कूलों की फाइल तय तारीख तक निदेशालय में जमा कराई जानी थी। कई फाइलें तय समय में जमा हुईं तो ऐसे स्कूलों की मान्यता कसौटी पर पार हो गई। वहीं, जिले के 28 स्कूलों की फाइलें तय तारीख से देर से पहुंची। नवंबर में निदेशालय स्तर से ऑनलाइन फाइल जमा कराने के लिए जिला विभाग में वापस लौटा दी गई। इस दौरान इन फाइलों पर संस्तुति हस्ताक्षर करने वाले कुछ सदस्यों की नजर पड़ी तो वह भी हैरान रह गए। इसमें से कई फाइलों पर उनके फर्जी हस्ताक्षर मिले। जिला परियोजना अधिकारी (डीएसएस) मुनेश चौधरी (वर्तमान) उस समय फरीदाबाद खंड शिक्षा अधिकारी थी। उन्होंने मामले की शिकायत कर जांच की मांग की है। इसी तरह, जिला विज्ञान विशेषज्ञ व बल्लभगढ़ खंड शिक्षा अधिकारी भी सकते में हैं। इनकी ओर से भी शिकायत कर मामले की जांच की मांग की गई है।
नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे स्कूल में लगी थी आग
डबुआ कॉलोनी स्थित एएमडी स्कूल में जून 2018 में आग लगने के कारण महिला सहित दो बच्चों की मौत हो गई थी। इस स्कूल को भी शिक्षा विभाग की ओर से मान्यता थी। स्कूल की दो शाखाएं संचालित थी। दोनों ही स्कूल संकरी गलियों में संचालित थे। इसी इमारत में स्कूल संचालक का परिवार रह रहा था। इसी के साथ कपड़ों की दुकान संचालित थी। अचानक आग लगने के कारण दुकान व मकान सहित स्कूल आग की चपेट में आ गया था। इस आग में संचालक की पत्नी व उसके दो बच्चों की मौत हो गई थी। ऐसे में बिना नियमों को पूरा करे स्कूलों की मान्यता में जारी फर्जीवाड़ा फिर किसी बड़ी मुसीबत को न्यौता दे रहा है।
जांच के लिए कमेटी गठित
फर्जी हस्ताक्षर से मान्यता लेने का मामला सामने आया है। जांच के लिए जिला स्तर पर कमेटी गठित की है। जल्द ही पूरा दृश्य साफ हो जाएगा।
- सतेंद्र कौर, जिला शिक्षा अधिकारी
जांच सोमवार से शुरू होगी। मान्यता प्राप्त स्कूलों की जिम्मेदारी कमेटी की है, चूंकि सदस्यों ने फर्जी हस्ताक्षर के बारे में शिकायत की है। ऐसे में मामला और संगीन है।
- अनीता शर्मा, स्कूल मान्यता जांच कमेटी हेड