ग्रेटर फरीदाबाद में कंपनी लगाकर महिलाओं से तैयार कराए मास्क
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कोरोना वायरस का संकट झेल रहे देश में लॉकडाउन की वजह से जहां आम आदमी सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। वहीं कामगारों के हाथ से रोजगार भी छिन गया। शहर से अनेक लोग गांव लौट गए। वहीं कुछ लोगों ने आपदा का डटकर सामना किया। इस दौरान उन्होंने आपदा को अवसर में बदलते हुए न केवल खुद को मजबूत किया, बल्कि करीब 250 महिलाओं को स्वावलंबी भी बनाया सेक्टर-15 ए निवासी आस्था भारद्वाज भी ऐसे ही एक महिला हैं जिन्होंने कोरोना संक्रमण से बचाव और सुरक्षा के लिए जहां मास्क बैंक की स्थापना की। वहीं महिलाओं से मास्क बनवाने का कार्य कराना शुरू किया। यह आज भी जारी है।
राशन देने जाती थीं, महिलाएं मांगती थीं रोजगार
सेक्टर-15ए निवासी आस्था भारद्वाज घर का काम संभालती (हाउस वाइफ) हैं। उनके पति डा. आदित्य भारद्वाज फरीदाबाद में ही आयकर उपायुक्त के पद पर तैनात हैं। जब देश कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी से जूझ रहा था। तब उन्होंने लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंद लोगों को घर-घर राशन वितरण कराया। ग्रेटर फरीदाबाद सहित शहर के विभिन्न इलाकों में जब वह राशन वितरण कर रही थीं, तब उनसे कई बेरोजगार महिलाओं ने काम की गुजारिश की। इस दौरान कोरोना से बचाव के लिए मास्क की काफी जरूरत महसूस की गई। इसके बाद वह अपने मन में आए इस ख्याल को हकीकत में बदलने के लिए लग गई।
बंद कंपनी में शुरू किया मास्क बनाने का काम
अप्रैल में उन्होंने ग्रेटर फरीदाबाद में एक उद्यमी की बंद कंपनी किराए पर ली। हालांकि मालिक ने उनसे किराया नहीं लिया। इस कंपनी में सिलाई की मशीनें लगाई गईं। बेरोजगार महिलाओं को अपने पास से कपड़ा उपलब्ध कराकर उनसे थ्री-लेयर मास्क तैयार कराने शुरू कर दिए। इससे उन महिलाओं को जहां रोजगार मिल गया। कई संस्थाएं भी उनके इस कार्य में सहयोग के लिए आगे आईं। एक दिन में एक हजार से अधिक मास्क तैयार किए जाने लगे। इसके बदले वह महिलाओं को उनका मेहनताना भी दे रही हैं। इससे अब उन महिलाओं को रोजगार मिल गया है।
संस्थाओं को बेचते हैं मास्क
कंपनी में तैयार इन मास्क को बाजार के साथ ही विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं को बेचा जाता है। ये संस्थाएं आगे लोगों को मुफ्त मास्क बांटती है और कोरोना के प्रति जागरूक करती है। इसके साथ ही दुकानों पर मास्क बेचते हैं। इन से आने वाले पैसों से कामगार महिलाओं को को उनका मेहनताना देती है।
वैश्विक कोरोना महामारी के दौरान जरूरतमंद लोगों को दो वक्त की रोटी के भी लाले पड़ गए थे। ऐसे में कुछ लोगों की मदद के लिए राशन वितरण कराना शुरू किया। इसी बीच महिलाओं ने रोजगार दिलाने की गुजारिश की। यह वाकई एक बड़ा सवाल था। मैं सोचती थीं कि आखिर किस प्रकार रोजगार दिलाया जा सकता है। ऐसे में हमने मास्क बनाने पर विचार किया। महिलाओं को जोड़ा और मास्क बनाना शुरू कर दिया।
-आस्था भारद्वाज