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Faridabad News: 25 सोसाइटियां बनीं स्वच्छता की मिसाल, 2500 टन कचरे का परिसर में ही निस्तारण

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शहर से निकलने वाले कुल कचरे में 30 से 40 प्रतिशत तक की लाई जा सकती है कमी
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद को कूड़े के ढेरों से मुक्त करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जिले की कई आवासीय सोसाइटियां और संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान में जिले की करीब 25 सोसाइटियों, सेक्टरों और संस्थानों में कचरे का निस्तारण परिसर के अंदर ही किया जा रहा है, जिससे शहर के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को नई दिशा मिली है।


नियमों के अनुसार, जिन सोसाइटियों और संस्थानों में प्रतिमाह 100 टन तक कचरा उत्पन्न होता है, उन्हें अपने परिसर में ही कचरे के निस्तारण की व्यवस्था करनी होती है। इसी क्रम में फरीदाबाद की 25 इकाइयों में कचरे का स्थानीय स्तर पर प्रबंधन किया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप करीब 2500 टन कचरे का निस्तारण हर माह परिसर के भीतर ही हो रहा है, जिससे नगर निगम पर बोझ कम हुआ है।
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ये हैं सोसाइटियां और संस्थान

कचरा प्रबंधन करने वाली प्रमुख सोसाइटियों और संस्थानों में सेक्टर-15, सेक्टर-14, सेक्टर-21ए, ओजोन सोलिटेयर, इम्पीरियल हाइट्स, पुरी अमनविलास लक्जूरिया, शिव साई पार्क, रेडवुड रेजीडेंसी, कुंजीन हाइट्स, ओमैक्स स्पा विलेज, मानव रचना विश्वविद्यालय, एसआरएस रॉयल हिल्स, आरपीएस सवाना, आरपीएस पाम, समर पाम, आईपी कॉलोनी, आईपी अपार्टमेंट, प्रिंसेस पार्क, केंद्रीय विद्यालय सेक्टर-46 और पीयूष हाइट्स सहित अन्य संस्थान शामिल हैं। स्वच्छता अभियान को केवल कागजों तक सीमित न रखते हुए इन सोसाइटियों के निवासी कचरा पृथक्करण और निस्तारण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। इन सोसाइटियों में नागरिक सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग एकत्रित करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और स्रोत स्तर पर पृथक्करण से भविष्य में कई प्रकार की बीमारियों और पर्यावरणीय समस्याओं को रोका जा सकता है।



एरोबिन तकनीक से बन रही जैविक खाद

फरीदाबाद की विभिन्न सोसाइटियों में आईपीसीए की ओर से स्थापित एरोबिन तकनीक गीले कचरे के निस्तारण में कारगर साबित हो रही है। इस तकनीक की मदद से बिना दुर्गंध के कम समय में गीले कचरे को उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद में बदला जा रहा है। नगर निगम आयुक्त ने भी माना है कि आईपीसीए जैसी संस्थाओं के सहयोग से सोसाइटियों में कम्पोस्टिंग को बढ़ावा मिल रहा है और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत हो रही है।



बंधवाड़ी लैंडफिल पर कम होगा दबाव



वर्तमान में फरीदाबाद से निकलने वाला अधिकांश कचरा बंधवाड़ी लैंडफिल साइट पर पहुंचता है, जो अरावली क्षेत्र के लिए गंभीर पर्यावरणीय चुनौती बन चुका है। नगर निगम का मानना है कि यदि शहर की सभी गेटेड सोसाइटियां और बड़े संस्थान अपने परिसर में ही कचरे का निस्तारण शुरू कर दें, तो शहर से निकलने वाले कुल कचरे में 30 से 40 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है।


निवासियों से बातचीत


हमारी सोसाइटी में कूड़े का निस्तारण किया जाता है और उससे खाद भी बनाई जाती है। सोसाइटी में प्लास्टिक को पुनर्चक्रण के लिए अलग से भेजा जाता है, जिससे उसका भी उपयोग हो सके।
- राजेश्री, संयुक्त सचिव, आरडब्ल्यूए, पीयूष हाइट्स सोसाइटी


कई वर्षों से हमारी सोसाइटी में खाद बनाने की प्रक्रिया चल रही है। खाद पौधों के विकास में मदद करती है और पर्यावरण को भी लाभ पहुंचाती है। यह प्रक्रिया हर सोसाइटी में होनी चाहिए।
- मोहित जैन, निवासी, समर पाम सोसाइटी



सोसाइटी में कूड़ा निस्तारण कर खाद बनाने की प्रक्रिया चल रही है। सभी निवासी घरों से निकलने वाले गीले और सूखे कूड़े को अलग- अलग करते हैं। कूड़े को रीसाइकिल कर कई चीजें बना सकते हैं।
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- आकाशदीप पटेल, आरडब्ल्यूए प्रधान, आरपीएस सवाना सोसाइटी



सोसाइटी में गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग किया जाता है, इससे खाद बनती है। इसका उपयोग सोसाइटी परिसर में करते हैं और सभी निवासियों को भी देते हैं, जिससे वे उसका उपयोग कर सकें।
- रमणीक, आरडब्ल्यूए प्रधान, प्रिंसेस पार्क सोसाइटी
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