रामलीला : डोली भूमि गिरत दसकंधर, छुभित सिंधु सरि दिग्गज भूधर
फरीदाबाद। रावण का जब अंत आया तो दसों दिशाओं में आग लग गई। पृथ्वी डोलने लगी। भगवान श्रीराम ने अपने कानों तक धनुष की डोरी को खींचकर एक साथ 31 बाण छोड़े। एक बाण ने रावण की नाभि के अमृत को सुखा दिया तो बाकी तीस बाणों ने उसके दसों सिर और बीसों भुजाओं को काट डाला। रावण पृथ्वी पर गिरा तो देवता पुष्पवर्षा करने लगे। भगवान राम के जयकारों से आकाश गुंजायमान हो उठा। शहर में चल रहीं विभिन्न रामलीलाओं के मंच पर इस दृश्य के साथ ही रावण का अंत हो गया। इस दौरान हजारों की संख्या में लोग उपस्थित रहे।
श्री श्रद्धा रामलीला कमेटी, सेक्टर-15
श्री श्रद्धा रामलीला कमेटी के मंच पर कुंभकरण, मेघनाथ, अहिरावण और रावण वध का मंचन किया गया। युद्ध के समय श्रीराम राम रावण के जितने सिर काटते हैं उतने ही सिर वापस आ जाते हैं। बाद में विभीषण नाभि कुंड के बारे में बताता है। भगवान राम रावण की नाभि में तीर मारकर उसका वध कर पुतला दहन किया गया।
श्री धार्मिक लीला कमेटी, एनआईटी-5
श्री धार्मिक लीला कमेटी के मंच पर रावण का वध हुआ। निर्देशक हरीश चंद्र आजाद ने बताया कि रामलीला के मंच पर प्रभु श्रीराम और रावण का भयंकर युद्ध हुआ। रावण की गर्जना का संवाद सिर पर सिर कट कट गिरेंगे, लाश होगी लाश पर, रक्त के नाले बहेंगे देखना आकाश पर रामलीला के मंच को हिला रहा था तो श्रीराम के संवाद पापियों का पलना अच्छा नही, पाप की टहनी का फलना फूलना अच्छा नही के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत होते हुए रावण का अंत हुआ। इसके बाद रावण ने लक्ष्मण को अंतिम संदेश देते हुए कहा कि पराई स्त्री पर बुरी नजर रखना वंश के अंत का कारण बनता है और अच्छाई ने हमेशा सचाई पर विजय पाई है।