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कश्मीर बाढ़ में फंसे अपनों की राह देख रहे फरीदाबादवासी

Thu, 11 Sep 2014 12:23 PM IST
राहुल श्याम/अमर उजाला, फरीदाबाद
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धरती के स्वर्ग जम्मू-कश्मीर में आए सैलाब ने हजारों परिवारों को अपने घरों से दूर कर दिया है। सैकड़ों जिंदगियां अभी भी जीवन बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं और कुछ अपनों के गले लगने के लिए सकुशल घरों तक पहुंचने को प्रयासरत हैं।
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फरीदाबाद-बल्लभगढ़ क्षेत्र के भी ऐसे पांच परिवार हैं जिनका जम्मू-कश्मीर गए अपने परिजनों से संपर्क नहीं हो सका है। यह परिवार दिन-रात केवल अपनों की सलामती की दुआ मांग रहे हैं, साथ ही न्यूज चैनल व समाचार पत्रों के जरिए अपनों की खोज-खबर लेने में जुटे हैं। इस बीच श्रीनगर से होटल मैनेजमेंट के एक छात्र ने बुधवार सुबह एसजीएम नगर में अपने घर फोन किया तो परिजनों की पथराई आंखें खुशी के आंसुओं से भर आईं।

पांच परिवारों को हैं इंतजार
ग्रेटर फरीदाबाद, एसजीएम नगर और बल्लभगढ़ के फतेहपुर बिल्लौच क्षेत्र के पांच परिवार अपनों के इंतजार में हैं। इनके परिजन जम्मू-कश्मीर गए थे। लेकिन वहां आई प्राकृतिक आपदा में कहीं गुम हो गए। उनका कुछ पता नहीं लग रहा है, बाढ़ के कुछ समय बाद तक तो परिजनों से बातचीत हुई लेकिन बाद में संपर्क टूट गया।
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संदेश के जरिए किया संपर्क
-ग्रेटर फरीदाबाद निवासी प्रशांत सत्संगी ने बताया कि उनकी बहन, जीजा व भांजा दिल्ली के आरके पुरम, सेक्टर-5 में रहते हैं। उनकी बहन पारुल बिस्ट एक एनजीओ में पीआरओ हैं और जीजा सिंह आनंद बिस्ट एक कंपनी में रिकवरी एग्जिक्यूटिव हैं, भांजा सिद्ध बिष्ट पढ़ता है। पूरा परिवार 5 सितंबर को श्रीनगर घूमने गया था।

प्रशांत के मुताबिक वहां पहुंच कर उनकी बहन ने फोन पर बताया था कि परिवार श्रीनगर के लाल बाजार के पास लंकार रिसॉर्ट में रुके हैं। बाढ़ आने के बाद भी परिवार से बात हुई थी। मंगलवार सुबह 9:36 बजे अंतिम बार बातचीत हुई। उसके बाद संपर्क नहीं हो पाया।

10:17 पर पारुल का एसएमएस आया जिसमें उन्होंने बाढ़ में घिरे होने व फोन चालू न होने की बात लिखी थी और बताया था कि परिवार यहां से निकलने की कोशिश कर रहा है। प्रशांत ने बताया कि इस संदेश के बाद कुछ पता नहीं कि उनकी बहन और जीजा कहां हैं। वहां के हालात देखकर परिजन बेचैन हैं। उनके साथ तीन कारोबारियों का भी परिवार है।

छात्र के लिए आर्मी बनी फरिश्ता
एसजीएम नगर निवासी संदीप जाखू की आंखें अपने छोटे भाई रवि कुमार की घर वापसी के लिए तरस रही हैं। संदीप ने बताया कि उनका भाई रवि कुमार श्रीनगर में होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहा है और राजबाग के पास अपने आधा दर्जन दोस्तों के साथ किराये के घर में रहता है। संदीप के मुताबिक बाढ़ के हालात में 7 सितंबर को आखिरी बार रवि से बात हुई थी, लेकिन उसके बाद से संपर्क टूट गया। संदीप के परिवार ने बुधवार सुबह करीब 6:30 बजे तब राहत की सांस ली, जब बाढ़ग्रस्त क्षेत्र से किसी तरह रवि ने घर पर फोन किया। सेना के जवान फरिश्तों की तरह लोगों को बचा रहे हैं, वह भी उस जगह पहुंच चुका है, जहां सेना के हेलीकॉप्टर लोगों को लेने आ रहे हैं।

तीन परिवारों में बढ़ी बेचैनी
कुछ ऐसा ही हाल बल्लभगढ़ के गांव फतेहपुर बिल्लौच में रहने वाले तीन परिवारों के सदस्यों का है। इनकी बेचैनी बढ़ती जा रही है, इन तीन परिवार के 12 सदस्य 3 सितंबर को जम्मू-श्रीनगर घूमने गए थे, लेकिन रविवार रात संपर्क टूट गया। गांव फतेहपुर बिल्लौच निवासी अजय गोयल ने बताया कि उसका भाई संजय गोयल अपने दोस्त मनोज गर्ग व अमित गोयल के परिवार के साथ घूमने गया था।

रविवार रात को संजय से बात हुई थी, उसने बताया था कि वह बाढ़ के कारण रचना होटल में फंसे हैं। होटल की दूसरी मंजिल तक पानी भर चुका है। होटल की बिजली भी कट गई है। जिसके कारण उनके मोबाइल चार्ज नहीं हो सके हैं। अजय ने सोमवार सुबह जब संजय को फोन किया तो उसका नंबर नहीं लगा। तब से लगातार वह फोन कर रहा है लेकिन संपर्क नहीं हो सका है। हालांकि इन सभी परिवारों को अपनों की सलामती के एक-एक संदेश मिल चुके हैं, लेकिन अब भी उन्हें सही-सलामत परिजनों के घर पहुंचने का इंतजार है।

न्यूज चैनल व अखबार पर नजर
सभी परिवार पूरे दिन न्यूज चैनलों व अखबारों पर नजरें गड़ाऐ हुए हैं। बार-बार चैनल बदल कर बाढ़ की खबरों को ध्यान से देख रहे हैं। परिजनों को आशा है कि शायद किसी चैनल या अखबार में उनके सदस्य का चेहरा दिख जाए या कोई जानकारी मिल जाए।
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