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तीन लाख घरों को फरीदाबाद नगर निगम नहीं दे पा रहा पानी

Tue, 25 Apr 2017 10:28 AM IST
भोला पांडेय/अमर उजाला, फरीदाबाद
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फरीदाबाद नगर ‌न‌िगम
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प्रदेश का सबसे पुराना और शहर का माई बाप कहा जाने वाला नगर निगम करीब तीन लाख घरों को पेयजल उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। इसका फायदा पानी माफिया उठा रहे हैं। वह पानी का कारोबार कर सालाना शहरवासियों से करीब 252 करोड़ रुपये कमा रहे हैं।
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यानी हर महीने 21 करोड़ रुपये पानी माफिया के जेब में जा रहा है। हैरानी की बात ये है कि रैनीवेल परियोजना शुरू होने के बाद भी अभी तक लोगों को भरपूर पानी नहीं मिल पा रहा है। ऐेसे में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है।

बता दें कि 207.8 स्वायर किलोमीटर क्षेत्र में फैले नगर निगम सीमाक्षेत्र की कुल आबादी 15.25 लाख है। वर्तमान में प्रतिदिन 262 एमएलडी(मिलियन लीटर पर डे) पानी की मांग है। लेकिन नगर निगम 222 एमएलडी पानी ही उपलब्ध करा पा रहा है।
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अर्थात 40 एमएलडी पानी की कमी है। इससे करीब तीन लाख घरों को पानी नहीं मिल पा रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो एक एमएलडी में 10 लाख लीटर पानी होता है। ऐसे में प्रतिदिन शहरी क्षेत्र में 4 करोड़ लीटर पानी की कमी है।

135 लीटर का है मानक:
-मानक के अनुसार प्रति घर को प्रतिदिन करीब 135 लीटर पानी की जरूरत होती है। इस लिहाज से 40 एमएलडी पानी कम मिलने से करीब तीन लाख घरों को नगर निगम से पानी नहीं मिल पा रहा है। खास बात ये है कि पिछले छह वर्षों से लंबित रैनीवेल परियोजना शुरू होने के बाद भी पानी की किल्लत बनी हुई है।

पानी माफिया काट रहे हैं चांदी:
भाजपा शासन आने के बाद भी पानी माफियाओं पर कोई रोक नहीं लग पाई है। किसी न किसी तरीके से सत्ता पार्टी के नेताओं से सांठ गांठ करके पानी माफिया हर महीने करीब 21 करोड़ रुपये लोगों की जेब से निकालकर अपनी जेब भरने में जुटे हैं। एक अनुमान के मुताबिक शहरवासियों को महीने भर का पानी खरीदने के बदले करीब 700 रुपये महीने खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में तीन लाख घरों में पानी पहुंचाने के बदले पानी माफिया 21 करोड़ रुपये कमा रहे हैं। यानी सालाना करीब 252 करोड़ रुपये का कारोबार पानी का हो रहा है। नगर निगम के मुख्य अभियंता ओपी गोयल ने दावा किया था कि इस बार पानी संकट नहीं होगा। अप्रैल से पहले ही रैनीवेल परियोजना शुरू हो जाएगी लेकिन महीना बीतने वाला है और आज तक रैनीवेल परियोजना प्रॉपर तरीके से शुरू नहीं हो पाई है।

क्या कहते हैं शहरवासी:
आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. ब्रह्मदत्त, रवींद्र चावला व राजन गुप्ता का कहना है कि नगर निगम शहरवासियों से विकास शुल्क, प्रॉपर्टी टैक्स, सीवर और पानी का शुल्क लेता है। इस लिए लोगों को पानी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निगम की है। यदि निगम अपने नागरिकों को पानी तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा है तो उसे खत्म कर देना चाहिए। उनका कहना है कि राजनीतिक व माफियाओं के गठजोड़ ने शहर का बेड़ा गर्क कर रखा है।

पानी समस्या को लेकर पूरा सदन गंभीर है। निगम अधिकारियों से पर्याप्त पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। यह शहर के लिए गंभीर मुद्दा है। इस बार सदन की बैठक में इस मुदद्े को उठाया जाएगा और हरहाल में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। क्योंकि जल के बिना सबकुछ सूना है। रही बात पानी माफियाओं की तो उनका भी सर्वे कराया जाएगा कि कहां कहां अवैध कनेक्शन होकर पानी का कारोबार हो रहा है।-सुमन बाला, मेयर फरीदाबाद
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पानी की उपलब्धता का इनपुट:
नगर निगम सीमाक्षेत्र           207.8 स्क्वायर किमी.
कुल जनंसख्या निगम क्षेत्र        15.25 लाख
पानी की पर डे मांग            262 एमएलडी
एनआईटी जोन में            130 एमएलडी
ओल्ड जोन में                78 एमएलडी
बल्लभगढ़ जोन में            54 एमएलडी
1392 एमसीएफ ट्यूबवेल से उपलब्धता    122 एमएलडी
4 हुडा रेनीवेल से उपलब्धता            30 एमएलडी
रैनीवेल जेएनएनयूआरएम से             70 एमएलडी
कुल पानी की उपलब्धता            222 एमएलडी
कुल पानी की कमी                40 एमएलडी
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