पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि आरोपी अखबारों में विज्ञापन देकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। लोगों को फंसाने के लिए टॉवर लगवाने के नाम पर एडवांस के तौर पर 90 लाख रुपये और प्रतिमाह 80 हजार रुपये का किराया दिलवाने और परिवार के दो सदस्यों को नौकरी दिलवाने की बात लिखवाते थे।
विज्ञापन पढ़कर लोगों इनसे संपर्क कर अपने प्लॉट या घर की छत पर टॉवर लगवाने के लिए राजी हो जाते थे। उसके बाद शुरू होता था इनका खेल। अपने जाल में फंसे शिकार से पैसे ऐंठने के लिए ये लोग कभी टेलीकॉम मंत्रालय से एनओसी तो कभी जीएसटी के नाम पर तब तक लोगों से पैसे ऐंठते थे, जब तक उन्हें ठगी का अहसास नहीं हो जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों में दो राष्ट्रीय स्तर के एथलीट
साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक बसंत कुमार ने बताया कि आरोपियों में दो राष्ट्रीय स्तर के एथलीट रह चुके हैं। गिरफ्तार आरोपी विनीत और अमित लंबी कूद में राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं। दोनों जल्दी पैसा कमाने के चक्कर में धोखाधड़ी करने लगे। इनका संपर्क तरुण से था। तरुण ही पूरे गिरोह का मास्टरमांइड है। उसने नवीन, दीपक और आशीष को 25-25 हजार रुपये वेतन पर रखा हुआ था।
तरुण ने नाथुपुर, गुरुग्राम में काल सेंटर खोला रखा था और नवीन, दीपक और आशीष उसके साथ ही किराए पर कमरा लेकर रहते थे, जबकि विनीत और अमित इन्हें कॉलिंग के लिए मोबाइल सिम कार्ड व धोखाधड़ी के के पैसे डलवाने के लिए खाता नंबर उपलब्ध कराते थे। पुलिस पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने कितने लोगों को इस तरह ठगा है।