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फरीदाबाद: सेक्टर 11 में पार्कों के बाहर लगा गंदगी का ढेर, हालत दयनीय

Thu, 19 Mar 2020 03:49 PM IST
Trainee Trainee अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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पार्कों के बाहर लगा गंदगी का ढेर - फोटो : अमर उजाला
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शहर के पॉश इलाकों में शामिल सेक्टर-11बी में जनसमस्याओं का अंबार है। होटल मिलन के पास सड़कों के साथ जगह खोद कर छोड़ दी गई है। वर्षों से यहां टाइल्स नहीं लगाई गई। पार्कों की हालत दयनीय है। ज्यादातर पार्क में गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। पेयजल की उचित व्यवस्था नहीं है। हर बार की तरह एक बार फिर गर्मियों में पेयजल संकट गहरा सकता है। आरडब्ल्यूए द्वारा सेक्टर की समस्याओं के लिए वार्ड पार्षद समेत नगर निगम अधिकारियों को कई बार शिकायत दी गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इससे लोग काफी परेशान है।

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सेक्टर-11बी में करीब 15 हजार परिवार निवास करते हैं। लोगों की सुविधा के लिए 50 से अधिक पार्क हैं। पार्क में न झूले और न ही बेंच की व्यवस्था है। घास की भी नियमित रूप से कटाई नहीं की जाती है। इस कारण बच्चों को दूसरे पार्कों में खेलने के लिए जाना पड़ता है। शहर में बिजली निगम का आईपीडीएस का काम चल रहा है। सेक्टर व कॉलोनियों में बिजली की पुरानी तारों की जगह नई तारे बिछाई जा रही है। वहीं सेक्टर-11बी में आज भी पुरानी जर्जर तारों से बिजली सप्लाई की जा रही है।

लोग बोले- गर्मी में पेयजल की न हो दिक्कत
सेक्टर में तीन साल पहले वार्ड पार्षद ने चार ट्यूबवेल का उद्घाटन किया था। जिससे की गर्मियों में पानी की दिक्कत नहीं हो। अब तक केवल एक ट्यूबवेल लगा है। इस वजह से गर्मियों में एक बार फिर लोगों को पेयजल किल्लत से जूझना पड़ सकता है।
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- गिर्राज सिंह, प्रधान, आरडब्ल्यूए

गंदगी की समस्या से बहुत परेशान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान को निगम अधिकारी पलीता लगा रहे हैं। सेक्टर में खाली प्लॉटों पर लोगों ने झुग्गियां बसाई हुई हैं। झुग्गियों में रहने वाले लोग खुले में शौच के लिए जाते हैं।
- एएस डूडी, वरिष्ठ उपप्रधान, आरडब्ल्यूए

पार्कों की हालत पर ध्यान कोई ध्यान नहीं दिया जाता। बीटा डेयरी के समीप बने पार्क का मुख्य गेट टूटा हुआ है। पार्क में न बेंच हैं और न बच्चों के खेलने के लिए झूले लगाए गए हैं। इस कारण बच्चों को घर में कैद हो कर रहना पड़ता है। निगम को पार्कों में माली की उचित व्यवस्था करनी चाहिए। - श्रृद्धा, स्थानीय निवासी

कुछ साल पहले बनी सीमेंटेड सड़कें टूटने लगी हैं। इससे हादसे हो रहे हैं। निगम अधिकारियों से शिकायत करते हैं, लेकिन अधिकारी आश्वासन देकर लौटा देते हैं। इसलिए खुद के पैसे से सड़कों की मरम्मत करवाई है।
- ओपी गोयल, स्थानीय निवासी 

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