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निगम सदन की बैठकों से नदारद रहे मंत्री-विधायक

Sat, 15 Nov 2014 08:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
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फरीदाबाद में पिछले लगभग 10 साल से नगर निगम सदन की बैठकों में विधायक, मंत्री और सांसद नहीं पहुंचे, जबकि यह लोग सदन के पदेन सदस्य होते हैं। ऐसा न करने से नौकरशाही पार्षदों पर हावी रही। मेयर तक को तवज्जो नहीं मिली। उन्हें प्रोटोकॉल तोड़कर बार-बार निगमायुक्त कार्यालय में जाना पड़ा।
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सदन में जो प्रस्ताव पास हो जाते, उस पर भी अधिकारी अमल नहीं करते। नतीजा पार्षद एक ही प्रस्ताव बार-बार देते। हंगामा होता तब जाकर कोई फाइल आगे बढ़ती। कई पार्षद पूरे पांच साल आरोप ही लगाते रहे कि उनके क्षेत्र में काम नहीं हुआ। कई बड़े मसले सामने आए, लेकिन किसी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सांसद विधायक सदन की बैठकों में आते रहते तो पार्षदों की हालत ऐसी न होती।

नगर निगम बजट में भी इन लोगों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। अरबों के बजट बनते रहे, पास होते रहे लेकिन आया कोई नहीं। जब नारियल फोड़ने की बारी आई तो पार्षदों के काम पर मंत्रियों, विधायकों ने नाम लिखवाया। लेकिन उनके समर्थन में नहीं आए। जो विधायक और मंत्री पहले पार्षद थे वह भी बड़ा पद पाने के बाद भूल गए।
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अब सत्ता बदली है। सांसद भाजपा के हैं। नगर निगम क्षेत्र में पड़ने वाली पांच विधानसभाओं में से तीन पर भाजपा का कब्जा है। पार्षदों और आम जनता को उम्मीद है कि इस बार सांसद और विधायक बैठक में शिरकत कर सदन को मजबूत करेंगे। मेयर अशोक अरोड़ा कहते हैं कि उन्हें तो याद नहीें कि कोई मंत्री, विधायक सदन की बैठक में आया हो। वह इस बार सभी को आमंत्रित कर रहे हैं।
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