दो बार नोटिस भेजे जाने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। उधर, पीड़ित परिवार ने दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर उन पतों की तलाश की तो वो भी फर्जी निकले। पीड़ित छात्रा ने हस्ताक्षर को फर्जी बताते हुए अपने सभी शैक्षिक प्रमाण पत्र व बैंक के दस्तावेज भी मजिस्ट्रेट का सामने पेश किए।
छात्रा ने आरोप लगाया कि उसके खिलाफ साजिश रची जा रही है। शादी 6 फरवरी 2018 को पंजीकृत दिखाई गई है। पीड़िता ने कहा कि जिस फोटो का इस्तेमाल शादी पंजीकरण में किया गया है वो फोटो उसने खुद जनवरी 2018 में ही सोशल मीडिया पर अपलोड की थी।
जांच के दौरान युवती ने कुछ साक्ष्य भी दिए हैं जिनसे पता चलता है कि युवक 11वीं क्लास में उसके साथ पढ़ता था। उसके बाद 12वीं क्लास में उसने किसी दूसरे स्कूल में दाखिला ले लिया। दिल्ली पुलिस ने स्कूल में दर्ज रिकार्ड के आधार पर पता किया तो मौजूदा वक्त में उस पते पर युवक का कोई परिजन नहीं रहता है।
वहीं मामले को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट यशवर्धन श्रीवास्तव जांच से पता चलता है कि शादी फर्जी तरीके से की गई। युवक ने सारे दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार किए। युवक के खिलाफ पहले से दिल्ली में रिपोर्ट दर्ज है। फर्जी साक्ष्य लगाकर शादी पंजीकरण कराने के मामले में गाजियाबाद में भी रिपोर्ट दर्ज कराने की संस्तुति जिलाधिकारी से की गई है।
गाजियाबाद में फर्जी तरीके से शादी पंजीकृत कराने का मामला बीते वर्ष के अंत तक धड़ल्ले से चला है। यहां शादी पंजीकृत कराकर विदेश जाने के मामले भी तेजी से बढ़ रहे थे, जिस पर बीते वर्ष अमेरिकी एंबेसी ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर जांच रिपोर्ट मांगी थी। उसके बाद जांच में जिले में संचालित करीब आठ आर्य समाज मंदिर फर्जी पाए गए थे जिनके खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी।
उसके बाद व्यवस्था की गई थी कि अब जिले के बाहर की शादियों का पंजीकरण बिना मजिस्ट्रेट की स्वीकृति के नहीं होगी। अगर शादी पंजीकृत कराई जाती है तो लड़की या लड़के में से कोई एक गाजियाबाद का निवासी होना चाहिए।