बरामद सभी सिक्के 10-10 रुपये के हैं। पिछले दो सालों के भीतर आरोपी मुंबई और इसके आसपास करोड़ों रुपये के नकली सिक्कों का ठिकाने लगा चुका है। आरोपी का कहना है कि चूंकि 10 रुपये के सिक्के की वेल्यू बेहद कम रकम है और इसकी पड़ताल भी कोई नहीं करता है। ऐसे में यह सुरक्षित धंधा था। पुलिस पकड़े गए आरोपी से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।
स्पेशल सेल के पुलिस उपायुक्त इंगित प्रताप सिंह ने बताया कि उनकी टीम ने अप्रैल 2022 में नकली सिक्का बनाकर देशभर में सप्लाई करने वाले गैंग खुलासा किया था। पुलिस ने सरगना नरेश कुमार को पकड़ा था। उसके पास से 10-10 रुपये के 10 हजार से ज्यादा के सिक्के बरामद किए थे। जिसके बाद चरखी-दादरी में छापेमारी कर सिक्के बनाने की फैक्टरी पकड़ी थी।
पुलिस ने वहां से चार लोगों को गिरफ्तार कर करीब 10.48 लाख के पांच, 10 और 20 के सिक्के बरामद किए थे। वहां से भारी मात्रा में कच्चा माल भी बरामद किया गया था। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी देशभर में नकली सिक्के सप्लाई करते थे। मुंबई में जिगनेश गाला नामक व्यक्ति को सप्लाई करते थे।
पुलिस ने एक टीम का गठन का जिगनेश की तलाश शुरू की। एक फरवरी को आरोपी मलाड, मुंबई से गिरफ्तार कर लिया। उनकी निशानदेही पर एक मारुति ईको वैन से 9.46 लाख रुपये के नकली सिक्के बरामद किए गए। आरोपी ने बताया कि वह पहले वह बैंकों से सिक्के व नोट लाकर कारोबारियों को सप्लाई करता था।
इनकी भारी डिमांड को देखते हुए उसने नकली सिक्के सप्लाई करने वाले लोगों से सिक्का लेना शुरू कर दिए। चूंकि कोई इनकी पड़ताल नहीं करता था, इनको मार्केट में चलाने में दिक्कत नहीं होती थी। आरोपी ने बताया कि वह जयपुर से माल उठाकर मुंबई लाता था। हर बार में करीब 10 लाख के सिक्के लाता था। वह 15 से 20 बार 10-10 लाख के सिक्के ला चुका है। पुलिस उससे पूछताछ गैंग के बाकी सदस्यों की तलाश कर रही है।