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सामने आया फर्जी ऑटो बीमा का चौंकाने वाला खेल, केवल दो हजार रुपये में हो रहा है आठ हजार का काम

Thu, 24 Dec 2020 02:03 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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गाजियाबाद में ऑटो के इंश्योरेंस कराने के नाम पर बड़ा खेल सामने आया है। कुछ दलालों ने बीमा के नाम पर सरकारी सिस्टम में भी सेंधमारी कर दी है। ऑटो का आठ हजार रुपये में होने वाला बीमा महज दो हजार रुपये में किया जा रहा है। 
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इतना ही नहीं बीमा करने के बाद उसे एम परिवहन एप पर भी चढ़ाया जा रहा है। अगर, पुलिस रास्ते में ऑटो के इंश्योरेंस की ऑनलाइन जांच करती है तो वह एप पर दिखाई देगा। जिससे ऑटो चालक पुलिस के चालान की कार्रवाई से बच जाएंगे। 

ऑटो चालक एवं बीमा करने वाले कुछ दुकानदार अमर उजाला की टीम द्वारा किए गए स्टिंग में साफ बोल रहे हैं कि दो हजार रुपये में इंश्योरेंस कराओगे तो आपके ऑटो के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी। 500 रुपये का बीमा किसी भी एप पर शो नहीं करेगा। 
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जबकि दो हजार रुपये वाला बीमा एप पर चेक करेंगे तो वह चढ़ा हुआ मिलेगा। वह साफ बोल रहे हैं कि किसी दिन ऑटो से दुर्घटना हो जाती है तो 500 और दो हजार रुपये वाले बीमा किसी काम नहीं आएगा। उसमें ऑटो चालक फंस सकते हैं। 

जब उनसे पूछा गया कि एम परिवहन एप पर फर्जी तरीके से किया गया बीमा कैसे फीड हो सकता है, तो उनका जवाब होता है। पैसे उसी के लिए जाते हैं। उन्होंने यह नहीं बताया कि वह किससे सेटिंग करके बीमा कराएंगे और कहां कराएंगे, लेकिन दावा किया है कि बीमा करने के बाद आपको चेक कराकर भेजेंगे। अमर उजाला के पास इसकी वीडियो मौजूद हैं। आइए देखते हैं चालकों ने इस संबंध में क्या कहा-

केस-1 ऑटो चालक
रिपोर्टर : ऑटो का बीमा कराना है कहां कराएं?
ऑटो चालक : बीमा हो जाएगा, आप गाजियाबाद चले जाओ।
रिपोर्टर : कितने रुपये में होगा बीमा?
चालक : वैसे तो सात या आठ हजार रुपये का होगा।
रिपोर्टर : कुछ ऑटो चालक बोल रहे हैं एक हजार 1500 में हो जाएगा?
चालक : हजार, 1500 रुपये वाला बीमा बेकार है।
रिपोर्टर : 1500 रुपये में एम परिवहन एप पर चढ़ जाएगा?
चालक : अब 1500 रुपये में न चढ़ाते हैं, दो ढाई हजार रुपये लेते हैं।
रिपोर्टर : यहां पर कहां हो जाएगा बीमा?
चालक : आप एक काम करो डासना टोल टैक्स के पास चले जाओ, वहां एक दुकान है वह दो से ढाई हजार में करा देगा।
रिपोर्टर : एक्सीडेंट हो गया तो कुछ मिलेगा या नहीं?
चालक : एक्सीडेंट होने पर कुछ नहीं मिलेगा, जेल भी चले जाओगे।
रिपोर्टर : तुमने कौन सा बीमा करा रखा है?
चालक : भाई हमारा तो वैसे ही फर्जी वाला है।
रिपोर्टर : सभी लोग ऐसे ही चला रहे हैं ऑटो?
चालक : सही वाला बीमा आठ हजार रुपये का है, कौन कराएगा, ऐसे ही चला रहे हैं।
रिपोर्टर : कोई रास्ता तो बताओ
चालक : देखो दो हजार वाला बीमा कराओगे, वह एप पर तो चढ़ा रहेगा, लेकिन अगर कोई मर गया तो आपको पूरा क्लेम देना पड़ेगा। उसकी जिम्मेदारी आपकी होगी।

 

केस-2 बीमा करने वाला दुकानदार
रिपोर्टर : भैया ऑटो का इंश्योरेंस कराना है?
दुकानदार : भैया इंश्योरेंस हो रहे हैं तीन तरह के।
रिपोर्टर : तीन तरह के इंश्योरेंस में क्या है?
दुकानदार : एक तो 500 रुपये में ऐसे ही बन जाता है। वह दिखाने कि लिए है। न तो वह ऑनलाइन आएगा और न ही उसमें कुछ मिलता है। दूसरा, एक ऐसा आता है जिसका बार कोड बन जाता है। उसका बार कोड स्कैन करेंगे तो पूरी डिटेल आ जाएगी। तीसरा, दो हजार रुपये में बनता है ऑनलाइन की तरह। वह ओरिजनल की तरह मिलेगा, लेकिन मिलना उसमें भी कुछ नहीं है।
रिपोर्टर : भैया हम मसूरी वाले रूट पर चलाने लगें, पुलिस ऑनलाइन चेक करेगी तो?
दुकानदार : उसकी टेंशन मत लो दो हजार रुपये में ऑनलाइन चढ़कर आएगा। करने दो चेक, लेकिन उसमें कोई क्लेम आपको नहीं मिलेगा।
रिपोर्टर : भैया दो हजार रुपये वाला ओरिजनल है या फर्जी?
दुकानदार : देखो जिनसे हम करा रहे हैं वह तो उसे ओरिजनल ही बताते हैं, लेकिन जब उसमें कुछ नहीं मिलता है तो वह हमारे लिए लोकल ही है।
रिपोर्टर : भैया चार ऑटो सेकेंड हैंड खरीदने हैं, उनका कराना है बीमा, पैसे लग रहे हैं ज्यादा ?
दुकानदार : मैं बता रहा हूं सीधी बात सुनो, चार ऑटो का मतलब हो गया 35 से 40 हजार रुपये का बीमा। फर्स्ट बीमा में भी आपको कुछ नहीं मिलना है।
रिपोर्टर : मसूरी से गाजियाबाद चलवाने हैं
दुकानदार : हाइवे पर तो चलेगा नहीं नेशनल परमिट होती है। इसकी मिलेगी सिटी परमिट। अनआथराइज में चला सकते हो।
रिपोर्टर : भैया कोई समाधान बताओ?
दुकानदार : दो हजार रुपये वाला बीमा करा लो, उसमें आपके सारे काम हो जाएंगे। परमिट, फिटनेस सब मिल जाएगी। 8 हजार रुपये खर्च करने की जरूरत ही नहीं है।
रिपोर्टर : भैया एक बता बताओ यह एम परिवहन पर शो कैसे करेगा?
दुकानदार : एम परिवहन या किसी भी एप पर चेक करोगे, उस पर ऑनलाइन मिलेगा। आपको कोई दिक्कत नहीं है। उससे आप पुलिस आरटीओ सबसे बच सकते हैं।
रिपोर्टर : तकनीकी कारण से नहीं आया एप पर तो?
दुकानदार : तुम चिंता मत करो, तुम्हें चेक कराऊंगा यहीं पर। सारे कागज आएंगे। हर कागज फीड होता है।
रिपोर्टर : भैया फर्जी बीमा कराने में डर लग रहा है
दुकानदार: आप पहली बार ले रहे हो ऑटो इसलिए कराने में डर रहे हो, लेकिन हमारे यहां सबसे ज्यादा यही करा रहे हैं। उसमें किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है। ऑटो के लिए यही बीमा ठीक है। आठ हजार रुपये की चीज दो हजार रुपये में हो रही है। तो क्या होगी आप खुद समझ लो भाई।

 
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सरकारी सिस्टम में सेंध

ऑटो चालक और बीमा करने वाले दुकानदारों के स्टिंग में साफ हो गया है कि किस तरह से दलालों ने सरकारी सिस्टम में सेंधमारी की है। वह दो हजार रुपये में फर्जी तरीके से बीमा कराकर उसे एम परिवहन एप पर फीड कर देते हैं, लेकिन बीमा करने वाले दुकानदार ने उन लोगों का नाम नहीं खोला है जो पर्दे के पीछे काम कर रहे हैं। 

वह दावे के साथ बीमा कराने से लेकर ऑनलाइन चढ़ाने तक की जिम्मेदारी ले रहे हैं। साथ ही दावा कर रहे हैं कि चेक करने वाले प्रत्येक एप पर यह बीमा सो करेगा। उन्होंने यह भी दावा किया है कि कुछ चुनिंदा लोग यह काम कर रहे हैं। हर जगह यह बीमा कराना संभव नहीं है। 

सवाल है कि पुलिस और विभागीय अधिकारी इस खेल की तह तक कैसे पहुंचते हैं। एआरटीओ प्रशासन विश्वजीत सिंह ने बताया कि कोई ऑटो चालक 500 रुपये में फर्जी बीमा लेकर चल रहा है तो पुलिस चेकिंग के दौरान कार्रवाई करेगी। 

दो हजार रुपये में फर्जी बीमा बनाकर कोई एम परिवहन एप पर ऑनलाइन फीड कर रहा है, इस तरह की कोई जानकारी नहीं है और न ही इस संबंध में कोई शिकायत आई है। अगर, ऐसा हो रहा है तो यह काफी गंभीर मामला है। इसकी जांच कराकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बीमा कंपनियों को भी इस संबंध में जांच करानी चाहिए।
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