हाईकोर्ट से कई बार फटकार खाने के बाद आखिर केंद्र सरकार ने आईटी पर सरकारी कामकाज के संबंध में ई-मेल पॉलिसी अदालत के समक्ष पेश कर दी। सरकार ने एडवाइजरी जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि जिस भी वेबसाइट का सर्वर देश से बाहर है उस पर सरकारी कामकाज व मंत्रालय का काम प्रतिबंधित रहेगा।
इसके अलावा इस पॉलिसी को कैबिनेट के समक्ष पेश किया जाएगा व अगले सप्ताह इसे मंजूरी मिल जाएगी। वहीं, अदालत ने फेसबुक-जीमेल व अन्य साइट पर डेटा स्थानांतरित करने के संबंध में सरकार से जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ के समक्ष अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने खंडपीठ के समक्ष सीलबंद ई-मेल पॉलिसी पेश की। उन्होंने अदालत को बताया कि इस पॉलिसी को मंत्रियों के समूह, राज्यों से मंजूरी मिल चुकी है।
इसके अलावा हमने सभी मंत्रालयों व विभागों को एडवाइजरी जारी की है जिसमें स्पष्ट किया गया है कि एनआईसी व सरकारी नेटवर्क उन साइट पर काम नहीं करेगा जिसका सर्वर देश से बाहर है। यदि ऐसा हुआ तो यह पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट की धारा 4 का उल्लंघन होगा।
अदालत के पूछने पर उन्होंने कहा कि एडवाइजरी सभी राज्यों को भी भेज दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अब इंटरनेट के जरिये विज्ञापन देने पर सर्विस प्रदाता कंपनी सर्विस टैक्स देना होगा व एक अक्तूबर से इसका प्रावधान कर दिया गया है।