काठमांडू में जब भूकंप आया तो इंदिरापुरम की रहने वाली शिखा भारद्वाज की आंखों के सामने 12 मंजिला दो टॉवर जमींदोज हो गए। जिस टॉवर में वह अपनी जुड़वा बेटियों के साथ थीं, वह अचानक हिलने लगा।
शिखा भारद्वाज ने बताया कि देखते ही देखते खिड़कियों के कांच टूटने लगे। ऐसा लगा जैसे जीवन खत्म होने वाला है। जहन में मौत का डर बैठ गया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
हिलते टॉवर में से बच्चियों को लेकर बाहर भागी। किसी तरह एयरपोर्ट पहुंची और वायुसेना की मदद से सकुशल घर पहुंच सकी।
शक्तिखंड-4 निवासी राजेंद्र भारद्वाज के बेटे रोशन भारद्वाज एक मल्टीनेशनल कंपनी में अधिकारी हैं। करीब तीन माह पहले रोशन का काठमांडू ट्रांसफर हुआ था।
रोशन, पत्नी शिखा और ढाई वर्षीय जुड़वा बेटी अनन्या और रक्षिता के साथ काठमांडू के ललितपुर के सनराइज टॉवर में रह रहे थे। पिछले दिनों रोशन ऑफिस के काम से मुंबई आए थे।
इस दौरान शनिवार को नेपाल में भूकंप आ गया। शिखा ने बताया कि शनिवार सुबह वह बच्चियाें के साथ 10वीं मंजिल पर थीं तभी पूरा घर अचानक हिलने लगा।
उन्होंने बालकनी से देखा तो आंखों के सामने दो 12 मंजिला टॉवर मिनटों में धराशायी हो गए। भयावह दृश्य देखकर खौफ घर कर गया और बेटियों को गोद में उठाकर नंगे पांव 10 मंजिल से नीचे भागी।
इस दौरान उनके ऊपर एक खिड़की का शीशा भी टूटकर गिरा। मगर जान की परवाह नहीं की। शिखा ने बताया कि सैकड़ों लोग उस टावर के मलबे में दब गए थे। इस दौरान कम्युनिकेशन के सभी माध्यम बंद थे।
शनिवार रात भूखे पेट एयरपोर्ट पर गुजारी और वायुसेना के विमान से सोमवार को बच्चियों को लेकर दिल्ली पहुंची। आप बीती बताते-बताते शिखा का कई बार गला रूंध गया।
बच्चियां को नहीं देखने दे रहीं टीवी
शिखा दोनों बच्चियों को टीवी नहीं देखने दे रही हैं। न्यूज चैनलों पर आ रहे दृश्यों को देखकर बेटियां घबरा रही हैं और रो रही हैं।
पति ने भगवान पशुपतिनाथ का किया धन्यवाद
पति रोशन मंगलवार को मुंबई से लौट आए। उन्होंने बताया कि भगवान पशुपतिनाथ ने परिवार को जीवनदान दिया है।
हालांकि उनके पिता राजेंद्र ने विदेश मंत्रालय के प्रति नाराजगी जताई। उनका कहना है कि वह मंत्रालय से लगातार शिखा और बच्चियों की जानकारी मांग रहे थे लेकिन नहीं मिली।