केवल विवाहेत्तर संबंध को किसी को खुदकुशी के लिए विवश करने का पर्याप्त कारण नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का हवाला देते हुए अदालत ने पत्नी और उसके माता-पिता को पति को खुदकुशी के लिए विवश करने के आरोपों से मुक्त कर दिया। युवक ने सुसाइड नोट में पत्नी के किसी युवक से नाजायज संबंध होने और आपत्तिजनक हालात में पकड़े जाने की बात लिखी थी।
कड़कडड़ूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि रिंकू उर्फ ललित ने सुसाइड नोट में केवल पत्नी के नाजायज संबंध होने की बात कही है। उसने किसी पर भी खुदकुशी के लिए उकसाने या विवश करने का आरोप नहीं लगाया है। केवल विवाहेत्तर संबंधों के आधार पर किसी को खुदकुशी के लिए उकसाने का जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
कोर्ट के समक्ष बचाव पक्ष के अधिवक्ता दीपक शर्मा ने पिनाकिन माहीपात्रे रावल बनाम गुजरात राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि केवल विवाहेत्तर संबंध को किसी को खुदकुशी के लिए विवश करने का कृत्य नहीं बताया जा सकता। ललित ने खुदकुशी करने का कोई अन्य कारण नहीं बताया है सिवाय पत्नी के नाजायज संबंधों के। केवल इस आधार पर आरोपियों पर खुदकुशी के लिए उकसाने के आरोप में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
पेश मामले में गुरु रामदास नगर लक्ष्मी नगर निवासी ललित ने 25 सितंबर 2013 को गले में फंदा लगाकर जान दे दी थी। सुसाइट नोट को फोरेंसिक जांच के लिए भिजवाया गया था। ललित की मां ने कोर्ट में अर्जी दाखिल की और अदालती आदेश पर थाना शकरपुर पुलिस ने उसकी पत्नी व सास-ससुर के खिलाफ खुदकुशी के लिए विवश करने की धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी।