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गर्भवती पत्नी के हत्यारे ने खोला हैरान करने वाला राज

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गर्भवती पत्नी की हत्या के जुर्म में दोषी शख्स ने अनाथ व विशेष जरूरत वाले बच्चों और अपने अंग दान करने की अनुमति मांगी है। अदालत ने दोषी को अनुमति देने संबंधी संभावना तलाश करने का निर्देश तिहाड़ जेल प्रशासन को दिया है।
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तीस हजारी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. कामिनी लाऊ ने दोषी महेश कुमार चौहान के आवेदन पर सुनवाई के उक्त निर्देश जेल प्रशासन को दिया है। मुकेश ने अपने आवेदन में लिखा है कि वह अपना रक्त व अंग दान करना चाहता है।

इसके उसने अनाथ व जरूरतमंद बच्चों की सेवा करने की इच्छा जाहिर की है। अदालत ने मुकदमे का फैसला सुनाते हुए मुकेश के उस इकबालिया को खारिज कर दिया जिसमें उसने अपनी पत्नी व मानसिक रूप से विकृत छह साल के बेटे की हत्या की बात कही। अदालत ने मुकेश को केवल पत्नी की हत्या का दोषी ठहराते हुये आजीवन कारावास की सजा सुनायी है।
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हाथापाई में ही गई पत्नी की हत्या

पुलिस के मुताबिक मुकेश ने जुलाई 2014 में भारी गुस्से में आकर पत्नी व बच्चे की हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने रेलगाड़ी के सामने आकर खुदकुशी करने का भी प्रयास किया था।

मामले की सुनवाई के दौरान मुकेश ने कहा कि उसकी गर्भवती पत्नी बेहद चिड़चिड़ी हो गयी थी और मानसिक रूप से विकृत बच्चे का ध्यान नहीं रख रही थी जबकि पूरी तरह माता पिता पर निर्भर था। उसने 16 जुलाई 2014 को बाथरूम में जाने पर देखा कि उसकी पत्नी ने तार से बच्चे का गला घोंट दिया और बच्चा फर्श पर गिरा हुआ था।

उसके पूछने पर पत्नी ने बच्चे की हत्या की बात कबूली और उसने अपने गले में भी तार लपेटा हुआ था और खुदकशी करने की कोशिश कर रही थी। इससे वह अपना आपा खो बैठा और हाथापाई में उसकी पत्नी का गला घुटने से मौत हो गयी।
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